जानिए, क्या है पाकिस्तान का परमाणु 'पाप'!

संजीव त्रिवेदी, नई दिल्ली (31 मार्च): ये खबर पूरी दुनिया की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। इसके अलावा भारत में हमारी आपकी सिक्योरिटी के लिहाज से बहुत बड़ी है। क्योंकि ये खतरा पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का है। सवाल उठा है कि क्या पाकिस्तान के परमाणु बमों की हिफाजत को सिर्फ पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र के भरोसे छोड़ा जा सकता है?  या फिर आईएस और तालिबान के लगातार बढ़ते खतरों के बीच पाकिस्तान का परमाणु बम पूरी दुनिया की तबाही ला सकता है? देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस एक सवाल के साथ न्यूक्लियर सिक्योरिटी समिट में भाग लेने के लिए वाशिंगटन में हैं। और भारत की तरफ से उठाए जा रहे इस सवाल को अमेरिका समेत ज्यादातर देशों का समर्थन है। 

भारत के पड़ोस में पल रही है वो तबाही जो पूरी दुनिया के लिए अब खतरा बन गई है। भारत का पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान जो अब तक सिर्फ हिंदुस्तान में आतंक का जहर घोलने की साजिश रचता था। उस पाकिस्तान की जमीन पर पल रहा है प्लान 110 जिससे पूरी दुनिया को खतरा महसूस हो रहा है। दुनिया पर तबाही का ये खतरा पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से है। क्योंकि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर अब आतंकवादियों की नजर है। इसीलिए पाकिस्तान के परमाणु पाप का अंत करने के लिए पहली बार न्यूक्लियर सिक्योरिटी समिट में शिरकत कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साथ दुनिया भर से वाशिंगटन पहुंचे करीब 50 नेताओं को इंतजार था नवाज शरीफ का। लेकिन दुनिया के देशों को जिस देश की परमाणु सुरक्षा को लेकर सबसे ज्यादा चिंता है, बैठक में उसी देश का नुमाईंदा मौजूद नहीं होगा।  

जिस मुल्क ने सिर्फ भारत से जंग का खतरा दिखाकर तबाही का जखीरा बढ़ाया है। उस पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की होड़ पर नकेल कसने के लिए भारत ने पूरी तैयारी की है। पाकिस्तान के परमाणु पाप पर लगाम के लिए भारत ने पूरी दुनिया से अपील की है। ताकि एक ऐसा सिस्टम बनाया जाए जिससे पाकिस्तान के परमाणु हथियार आईएस या आतंकियों के हाथ ना लगें। क्योंकि भारत समेत पूरी दुनिया जानती है कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान इलाके में तालिबान, हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकी संगठन पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर गिद्ध नजर लगाए बैठे हैं। 

परमाणू सुरक्षा पर पाकिस्तान का ट्रैक रिकार्ड दुनिया के सभी देशों को परेशान करता है क्योंकि वो पाकिस्तान की ही गैरजिम्मेदाराना हरकत थी जिसकी वजह से नब्बे के दशक में उत्तर कोरिया जैसा इंसानियत का दुश्मन देश परमाणु ताकत वाला बन गया था। वही उत्तर कोरिया जो अब अपने सनकी शासक किम जोंग उन और उसके परमाणू अस्त्रों की वजह से अमेरिका समेत सारी दुनिया के लिए सिरदर्द बना हुआ है। पाकिस्तान को लेकर चिंता की एक और खास वजह है। अमेरिका के पास ये जानकारी पहुंच चुकी है कि पाकिस्तान ने पिछले दिनो अचानक अपने वैटलफील्ड न्यूक्लियर वेपन्स की तैनाती कर दी है। इस खतरनाक कदम के पीछे की वजहें क्या हैं, ये पता नहीं चल रहा … लेकिन ये तय है कि इस तैनाती के बाद पाकिस्तान के परमाणू हथियार सुरक्षित नहीं माने जा सकते। 

हाल के दिनों में आईएस की बढ़ती मौजूदगी ने आतंक को नया आयाम दे दिया है। अमेरिकी रक्षा एजेंसियों के आकलन के अनुसार आईएस, हक्कानी और तालिबान जैसे आतंकी संगठनो की कोशिश पाकिस्तान के टैक्टिकल न्यूक्लिय वेपन्स को हासिल करने की हो सकती है। भारत की तरफ से इस बैठक में यही चिंता दर्ज कराई जाएगी कि - क्या सिर्फ पाकिस्तान आर्मी के भरोसे पाकिस्तान के परमाणू अस्त्रों की सुरक्षा को छोड़ा जा सकता है। या फिर इसके लिए किसी वैश्विक तंत्र की जरूरत है। उम्मीद की जा रही है कि संयुक्त राष्ट्र, इंटरनेशनल एटोमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) इंटरपोल और जी-8 जैसे संगठनो के जरिए इस बैठक में ऐसा एक्शन प्लान बनाया जाएगा। ताकि किसी भी हालात में आतंकी परमाणु सुरक्षा के लिए खतरा न बन सकें।