EXCLUSIVE: जानें क्या है रामगोपाल यादव का यादव सिंह से रिश्ता?

नई दिल्ली (23 अक्टूबर): सपा में मचे घरेलू कलह में अब तक एक बड़ा चेहरा रहे रामगोपाल यादव की बलि ली जा चुकी हैं। शिवपाल यादव ने जिस तरह से मीडिया के सामने रामगोपाल पर वार किया, वह पहले कभी परिवार में देखने को नहीं मिला।

शिवपाल यादव ने सीधे-सीधे रामगोपाल यादव पर भ्रष्‍टाचार में लिप्त और उनके संबंध यादव सिंह से बता डाले। उन्होंने कहा कि सीबीआई से डरे रामगोपाल बीजेपी से मिलकर पार्टी को कमजोर करने के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह कि आखिर रामगोपाल को ऐसा क्या डर है जो वह भाई का साथ छोड़कर बीजेपी नेताओं के साथ मीटिंग करने में व्यस्त है। इसके लिए जानना होगा कि रामगोपाल का यादव सिंह से क्या रिश्‍ता है।

करोड़ों की घूस लेकर ठेके बांटने के आरोपी यादव सिंह के साथ प्रोफेसर रामगोपाल यादव का नाम जुडा है, जाने सच... - 27 नवंबर 2014 को जब यादव सिंह के a-10, सेक्टर 51 के इस घर में आयकर विभाग ने छापा मारा तो यहां पर 62 पन्नों वाला कागजों का एक पुलिंदा मिला था। इन 62 पन्नों में अनेक नेताओं के फोन नंबर और किसके लिए काम किया गया इसका जिक्र किया गया है, लेकिन 62 पन्नों में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है पेज नंबर 5 जिस पर प्रोफेसर रामगोपाल यादव का नाम लिखा है।

दस्तावेजों के मुताबिक पेज नंबर 5 और 6 पर हाथ से लिखा गया है 302/78.64- बलराम यादव c/o प्रोफेसर रामगोपाल यादव

सीबीआई हिरासत में मौजूद यादव सिंह को ये दस्तावेज दिखाकर पूछताछ की गई कि बलराम यादव कोई नेता है या ठेकेदार जिसे रामगोपाल यादव के नाम पर ठेका दिया गया है या पैसा।

पेज नंबर 7 पर हाथ से लिखी हुई कुछ लाईनें और भी चौंकाने वाली हैं। पेज नंबर 7 पर लिखा है, यादव सिंह प्रमुख अभियंता को ग्रेटर नोएडा औऱ यमुना अथॉरिटी का समस्त इंजीनियरिंग का कार्य देना है।

मतलब समझ रहे हैं आप नोएडा प्राधिकरण का चीफ इंजीनियर बनाने की बात लिखी है और यादव सिंह मुख्य अभियंता से ही चीफ इंजीनियर की कुर्सी पर बैठे थे।

रामगोपाल यादव से पहले पिछले साल सितंबर 2015 में उनके बेटे अक्षय यादव का नाम यादव सिंह के साथ जुड़ चुका है। अक्षय यादव पर यादव सिंह ग्रुप की करोड़ों की कंपनी को कौड़ियों के भाव में खरीदने का आरोप लगा था।