वास्तव में पेट्रोल 34.04 और डीजल 38.67 रुपये मिलना चाहिए, इसलिए मिलता है इतना महंगा

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 दिसंबर): देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती-घटती कीमते आम आदमी को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। हालांकि इस समय तेल के दाम कुछ स्थिर जरूर हैं, लेकिन अगर रुपये के मुकाबले डॉलर बढ़ा तो उसमें भी इजाफा देखने को मिलेगा। भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का सबसे बड़ा कारण इसपर लगने वाला टैक्स भी है, क्योंकि राज्य से लेकर केंद्र सरकार सभी इससे मिलने वाले टैक्स से अपने खजाने को भरती है।

अगर आप एक लीटर पेट्रोल या डीजल की कीमत का अध्ययन करेंगे तो आपको पता चलेगा कि असल में यह इतना महंगा नहीं है, जितना हम लोगों को मिलता है, बल्कि राज्य और केंद्र सरकार के टैक्स ने इसे महंगा बना दिया गया है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि अगर टैक्स और कमीशन हटा दें तो पेट्रोल व डीजल की आज जो कीमत है, आम आदमी को यह उससे भी आधे दाम पर मिल सकता है।

पेट्रोल पर टैक्स और कमीशन 96.9 प्रतिशत

वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने लोकसभा को लिखित रूप में हाल में बताया कि पेट्रोल पर 96.9 प्रतिशत टैक्स और कमीशन लगाया जाता है, जबकि डीजल के मामले में यह आंकड़ा 60.3 फीसदी है। पेट्रोल की इस कीमत में 17.98 रुपये केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी, 15.02 रुपये राज्य सरकार का वैट और 3.59 रुपये डीलर का कमीशन शामिल है। डीजल में एक्साइज ड्यूटी 13.83 रुपये, राज्य का वैट 9.51 रुपये और डीलर का कमीशन 2.53 रुपये है।

इतना पड़ता है फर्क

उदाहरण के लिए दिल्ली-एनसीआर में टैक्स और डीलर का कमीशन निकाल दें, तो पेट्रोल की कीमत सिर्फ 34.04 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत केवल 38.67 रुपये प्रति लीटर रह जाएगी। 22 दिसंबर को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 70.27 रुपये और डीजल की कीमत 64.19 रुपये है।

एक्साइज ड्यूटी से सरकार की कमाई

चालू वित्त वर्ष (2018-19) के पहले छह महीनों में पेट्रोल और डीजल की एक्साइज ड्यूटी के जरिए केंद्र सरकार की कमाई क्रमश: 25,318.1 करोड़ रुपये और 46,548.8 करोड़ रुपये दर्ज की गई। विदेशी बाजारों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते अक्टूबर में सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें हर रोज तय होती हैं। केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी निर्धारित है, जबकि राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की वैट दरें अलग-अलग हैं।