आरबीआई की हिदायतः जांच-परख कर ही लें 500 और 1000 के नोट !

नई दिल्ली (30 अक्टूबर):  फेस्टिव सीजन चल रहा है, ऐसे में बड़े नोटों की जांच करके ही लेना चाहिए। रिजर्व बैंक ने हाल ही में एक सर्कुलर जारी किया है। इसके तहत लोगों को सलाह दी है कि 500 और 1000 के नोट लेने से पहले उसे जांच लीजिए कि कहीं वह नकली तो नहीं है। ऐसे में आपको बता दें कि असली और नकली नोट में अंतर करना बेहद आसान है। नीचे लिखी बातों के जरिए असली नकली नोटों में फर्क करना बहुत सरल है।

- वार्टर मार्कः 500 और 1000 रुपए के नोट में वार्टर मार्क आता है। उसे देखकर ही नोट लें। इसके लिए भारतीय नोट पर बने गांधी जी को अगर हल्के शेड वाली जगह पर तिरछा करके देखा जाए तो वार्टर मार्क दिखाई देता है।

- सिक्योरिटी थ्रेड : नोट के एकदम बीच में सीधी लाइन पर ध्यान से देखने पर हिंदी में भारत और आरबीआई लिखा होता है। यह सिक्योरिटी थ्रेड होता है।

- ऑप्टिकल वेरिएबल इंक : ऑप्टिकल वेरिएबल इंक का प्रयोग 1000 और 500 के नोट में किया जाता है। नोट के बीच में 500 और 1000 के अंक को प्रिंट करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। जब नोट को सीधा पकड़ा जाता है तो यह हरे रंग का दिखाई देता है और एंगल बदलने पर इसका रंग बदलता रहता है।

- फ्लोरेसेंस : नोट पर नीचे की तरफ विशेष नंबर दिए होते हैं जो कि एक खास सीरीज के तहत होते हें। इन नंबर्स को फोरेसेंस इंक से प्रिंट किया जाता है। जब नोट को अल्ट्रा वॉइलेट लाइट में देखा जाता है तो ये उभर कर दिखाई देते हैं।

-इंटेग्लिओ प्रिंटिंग : नोट पर प्रयोग की जाने वाली स्याही या इंक विशेष प्रकार की होती है जिसकी वजह से महात्मा गांधी जी की फोटो, आरबीआई की सील और प्रोमाइसिस क्लॉस, आरबीआई गवर्नर के साइन को छूने पर उभरे हुए महसूस होते हैं।