जानिए, 'अग्निपरीक्षा' के बीच कैसे बदल गई है उत्तराखंड की सूरत...

शिवांग माथुर, अधीर यादव, नैनीताल/नई दिल्ली (3 मई): उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में जंगलों की लगी आग अब तक शांत नहीं हो पाई है। 2 महीने से लगी इस आग को बुझाने की तमाम कोशिशें की जा रही हैं। लेकिन इस काम में कामयाबी पाने में बहुत वक्त लग सकता है। आग लगने के बाद उत्तराखंड की सूरत बदल गई है।

उत्तराखंड के ये जंगल आज भी धधक रहे हैं। करीब 2 महीने से लगी इस आग पर आज भी काबू नहीं पाया गया है। जिस आग ने पहले हिमालय गायब किया। जिस आग से हिमालय के ग्लेशियर तक पिघलने लगे अब वो आग दम घोंट रही है। नैनीताल के पास पंगोट गांव है। नैनीताल उन जिलों में से है जहां जंगल की आग ने सबसे ज्यादा कहर मचाया। पंगोट गांव इसी आग की तपिश बहुत करीब से महसूस की।

1200 लोगों की आबादी वाला ये गांव चारों तरफ से जंगल से घिरा हुआ है। इसी वजह से जंगल में लगी आग ने चारों तरफ से इस गांव को घेर लिया। जो घर जंगल से बिल्कुल सटे हुए थे। उस घर से आंगन तक आग पहुंच गई थी। रात को अचानक इस आग ने गांव में हड़कंप मचा दिया। लोग उस रात को याद कर अब भी सहमे हुए हैं। घरों तक पहुंची इस भयानक आग को गांव वालों ने जैसे तैसे खुद ही बुझाया। अगर वो वन विभाग का इंतजार करते या आग बुझाने में थोड़ी भी देर होती तो इस गांव के लोगों की जान मुश्किल में पड़ सकती थी। 

आग बुझ चुकी है लेकिन आग का खौफ अब भी गांव वालों के दिलों में जल रहा है। सबसे बड़ी समस्या गांव के जानवरों के लिए खड़ी हो गई है। आग की वजह से जंगल में रखा जानवरों का चारा जल चुका है। आस पास कहीं भी जानवरों के खाने के लिए घास नहीं बची है। नैनीताल से करीब 15 किलोमीटर दूर पंगोट गांव सैलानियों की पसंदीदा जगह है। यहां बर्ड सेंचुरी भी है। खूबसूरत पक्षियों के आशियाने हैं, लेकिन इस आग में वो भी ना जाने कितने आशियाने जल कर तबाह हो गए।

उत्तराखंड के जंगलों में तबाही की  ऐसी आग जल रही है कि देखने वाले सकते में पड़ गए हैं। पुलिस, सेना, वायुसेना, वन विभाग और सरकार सभी आग पर काबू पाने में जुटे हैं। इसकी लपटें आसमान को छू रही है। उत्तराखंड के जंगलों में लगी ये आग अब तक 2500 हेक्टेयर के जंगल जलाकर खाक कर चुकी है। हल्द्वानी एयरबेस से ये हेलिकॉप्टर हर रोज उड़ान भर रहे हैं। इनका मिशन है पास की झीलों से पानी लेना और इस पानी की बरसात उन इलाकों में करना जहां आग का खतरा सबसे ज्यादा है।

एक तो चारो ओर उंचे उंचे पहाड़, दूसरी ओर धुंध और धंए का गुबार। जब ये हलिकॉप्टर आग वाले इलाके के उपर उड़ान भरते हैं तो आसा पास कुछ भी नजर नहीं आता। यही कारण है कि इस आग को बुझाने में बहुत दिक्कत आ रही है। लेकिन महज कॉकपिट में लगे इस मशीनों के सहारे, इस खतरनाक मिशन को अंजाम दे रहे हैं, एयरफोर्स के जांबाज पायलट। 

दूसरी दिक्कत ये है कि हेलीकॉप्टर की हवा से आग भड़क भी ज्यादा रही है। हेलीपैड के उड़ान भरने के बाद वायुसेना के ये एसआई 17 हेलिकॉप्टर , पास की भीम ताल से पानी भर रहे हैं। इस खास बाल्टी बैंबी बकेट में। पहाड़ों की इस भीषण आग को बुझाने में ये बैंबी बकेट बहुत कारगर साबित हो रही है। उत्तराखंड के जंगलों में पिछले 2 महीने से लगी इस आग में अब तक अरबों का नुकसान हो चुका है। जंगलों में लगी जड़ी बूटियां खत्म हो चुकी है। आने वाले कुछ घंटों में कुछ इलाकों में बारिश होने की संभावना है। शायद तब बेकाबू हो चुकी ये आग शांत हो जाए। 

इस आग ने उत्तराखंड की हवा को भी जहरीला बना दिया है। राज्य का प्रदूषण स्तर बढ़ गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उत्तराखंड और हिमाचल को नोटिस जारी किया है और ये पूछा है कि आग को बुझाने के लिए क्या इंतजाम किए जा रहे हैं। आग को बुझाने का बड़ा ऑपरेशन पिछले 3 दिन से चल रहा है लेकिन स्थिति अब तक साफ नहीं हो पा रही है कि कितनी आग बुझ पाई है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि आग अब भी भड़की हुई है। लेकिन केंद्र सरकार दावा कर रही है कि बहुत तक आग पर काबू पा लिया गया है।  

इस भयानक आग को बुझाने के लिए वन विभाग के 9000 कर्मचारियों के साथ एनडीआरएफ और सेना के जवान जी जान से लगे हैं। एक बड़ी समस्या ये भी है कि आग जहां बुझ भी गई वहां धुंआ इतना ज्यादा बढ़ गया है कि आस पास रहने वाले लोगों को सांस की समस्या हो रही है। डॉक्टरों के पास मरीजों की लाइन बढ़ गई है।

आग को बुझाने का काम चल रहा है लेकिन आग पर काबू पाने में अभी बहुत वक्त लग सकता है। आग बुझ भी जाए लेकिन इस आग ने पहाड़ों की सुंदरता पर एक बहुत बड़ा दाग लगा दिया है। इस आग का असर जल्द शुरु होने वाली चार धाम यात्रा पर भी पड़ सकता है।