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कौन हैं मैरीकाॅम, जानिए उनके जीवन से जुड़ी खास बातें

महिला वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2018 के 48 किग्रा. भारवर्ग में भारत की स्टार महिला मुक्केबाज बॉक्सर मैरीकॉम ने इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड छठी बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। पांचों जजों ने ब्‍लू कॉर्नर यानी मैरीकॉम को 48 किग्रा का विश्‍व चैंपियन घोषित किया।

                                                                                                             Image Source: Google

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (24 नवंबर): महिला वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2018 के 48 किग्रा. भारवर्ग में भारत की स्टार महिला मुक्केबाज बॉक्सर मैरीकॉम ने इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड छठी बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। पांचों जजों ने ब्‍लू कॉर्नर यानी मैरीकॉम को 48 किग्रा का विश्‍व चैंपियन घोषित किया।भारतीय महिला मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम पूरी दुनिया में धूम मचा चुकी हैं। उन्होंने अपने कठिन परिश्रम से यह साबित कर दिया कि प्रतिभा का अमीरी और गरीबी से कोई संबंध नहीं होता।बता दें कि मैरीकाॅम का जन्म 1 मार्च 1983 को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में हुआ। उनके पिता एक गरीब किसान थे। मैट्रिकुलेशन की परीक्षा पास नहीं होने के कारण स्कूल छोड़ दिया और फिर आगे की पढाई ‘नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ ओपन स्कूलिंग’, इम्फाल, से की।बता दें कि उन्होंने अपना स्नातक चुराचांदपुर कॉलेज से पूरा किया। उनको खेल-कूद का शौक बचपन से ही था और उनके ही प्रदेश के मुक्केबाज डिंग्को सिंह की सफलता ने उन्हें मुक्केबाज़ बनने के लिए और प्रोत्साहित कर दिया।गौरतलब है कि एशियन महिला मुक्केबाजी प्रतियोगिता में उन्होंने 6 स्वर्ण और एक रजत पदक जीता है, महिला विश्व वयस्क मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में भी उन्होंने 5 स्वर्ण और एक रजत पदक जीता है, एशियाई खेलों में मैरी ने 2 रजत और 1 स्वर्ण पदक जीता है।इतना ही नहीं आपको बता दें कि 2012 के लन्दन ओलिंपिक्स में कांस्य पदक जीत कर उन्होंने देश का नाम ऊंचा किया। इसके अलावा मैरी काॅम ने इंडोर एशियन खेलों और एशियन मुक्केबाजी प्रतियोगिता में भी स्वर्ण पदक जीता है।-1 अक्टूबर 2014 को मैरी ने इन्चिओन, दक्षिण कोरिया, एशियन खेलों में स्वर्ण जीत कर नया इतिहास रचा। वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज़ बनीं।-सन् 2001 में प्रथम बार नेशनल वुमन्स बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीतने वाली मैरी कॉम अब तक 10 राष्ट्रीय खिताब जीत चुकी हैं। मुक्केबाजी में देश को गौरवान्वित करने वाली मैरी को भारत सरकार ने वर्ष 2003 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।-वर्ष 2006 में पद्मश्री और 2009 में उन्हें देश के सर्वोच्च खेल सम्मान ‘राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

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