रामवृक्ष यादव: जयगुरुदेव के शिष्य से मथुरा हिंसा का 'मास्टरमाइंड' बनने की पूरी कहानी

प्रशांत गुप्ता, नई दिल्ली (4 जून): हिंदुस्तान का हिटलर बनने की ख्वाहिश रखने वाला मथुरा का खूनी कमांडर रामवृक्ष मारा गया। इस बात की पुष्टि आज यूपी के डीजीपी ने कर दी। कमांडर भले ही मारा गया लेकिन उसकी खौफ की रियासत के निशान मथुरा में अब भी हैं। रामवृक्ष ने सत्याग्रह के नाम पर जो तांडव मचाया था, रह रह कर उसकी निशानियां अब भी सामने आ रही हैं। आज हम आपको रामवृक्ष की और इसके खूनी संघर्ष की पूरी कहानी बताएंगे।

पिछले 2 साल से मथुरा की इस 270 एकड़ की जमीन पर चल रही थी एक समानांतर सरकार। इस पार्क की दहलीज पर आकर लोकतंत्र भी दम तोड़ देता था और फिर शुरू होता था मनमानियों का साम्राज्य। जिसके पीछे सबसे बड़ा शातिर दिमाग था इस शख्स का- नाम रामवृक्ष यादव। 

2 साल पहले मथुरा आए रामवृक्ष यादव के मन में हमेशा से चोर था। वो यहां सिर्फ अपनी मांगे नहीं बल्कि बड़े इरादे से आया, शुरुआत में 500 लोगों के साथ आए रामवृक्ष ने धीरे धीरे और लोगों को जोड़ना शुरू किया। लोग इसके साथ इस पार्क में रहने लगे लेकिन इसके इरादों से बिल्कुल अंजान। रामवृक्ष के इस साम्राज्य में आने की इजाजत तो थी लेकिन जाने की नहीं। 

खबर आई है कि जवाहरबाग में कब्जा जमाए बैठे रामवृक्ष और उसके समर्थकों में कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्हें रामवृक्ष के इस साम्राज्य में कैद करके रखा गया था। अगर कोई इस पार्क से बाहर जाता तो उसका बकायदा पास बनाया जाता था। कब्जाए हुए पार्क में रहने वाले हर इंसान का एक रिकॉर्ड और नंबर था। उनके रिहायशी पते, फोन नंबर, तस्वीर और दूसरी जानकारियां, सबका रिकॉर्ड रखा गया था।

रामवृक्ष की मांग कुछ भी हो लेकिन उसका मकसद इस जमीन को हड़पना ही था। सत्याग्रह के नाम पर ये शख्स मथुरा में कैसी गुंडागर्दी फैलाता और हमेशा बंदूकधारियों के बीच चलता था। 

रामवृक्ष की सोच और उसके कारनामे ने मथुरा के जवाहर बाग को जहन्नुम बना दिया। इस कुकर्म में ये अकेला नहीं था, इसके साथ थी इसकी पूरी सेना। बताया जा रहा है कि चंदन बोस नाम के शख्स ने जवाहरबाग में धीरे धीरे हथियारों का जखीरा इकट्ठा किया। इसी चंदन ने रामवृक्ष के समर्थकों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी।

रमावृक्ष का दाहिना हाथ बताए जाने वाला ये चंदन बोस नक्सली कमांडर है। इसी चंदन बोस ने इस खूनी खेल की बुनियाद डाली। इसी ने बोस के नाम पर स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह का आंदोलन शुरू किया। और जवाहर बाग में हथियारों का ज़खीरा जमा किया। चंदन बोस पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। 

चंदन बोस जैसे नक्सली के साथ मिलकर रामवृक्ष ने मथुरा में ऐसी खूनी सल्तनत शुरू की जिसका नतीजा आज ये हुआ कि दो जांबाज़ पुलिस अफसरों की हत्या हो गई। इसके सनकीपन ने 25 लोगों को मरवा दिया। और एक शांत शहर अशांत हो गया

जय गुरुदेव का शिष्य था रामवृक्ष

रामवृक्ष कभी जय गुरुदेव का शिष्य हुआ करता था। बताते है कि जय गुरुदेव के निधन के बाद जब उनसे जुड़ी मिल्कियत पर रामवृक्ष यादव को हिस्सा नहीं मिला तो इसने अलग होकर अपने समर्थकों की प्राइवेट आर्मी बना ली। जिनके पास एके-47 तक होने का दावा किया गया। गाजीपुर का रहने वाला रामवृक्ष यादव लोकसभा और विधानसभा दोनों का चुनाव भी लड़ चुका है। 

270 एकड़ की जमीन पर कब्जा करने का सपना देखने वाला खूनी कमांडर रामवृक्ष कभी इस मकान में रहता था। गाजीपुर के मरदह थाना क्षेत्र के मठिया गांव में है रामवृक्ष का घर। आज यहां ताला लगा है। रामवृक्ष की इस गांव में ढ़ाई बीघा जमीन भी है, जो बंजर पड़ी है।

आपको अचंभा होगा ये जानकर कि सत्याग्रह के नाम पर जिस रामवृक्ष ने मथुरा में खूनी खेल खेला वो कभी बाबा जयगुरुदेव का शिष्य था। लेकिन अतिमहात्वकांशी होने के कारण ये अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। करीब 40 साल पहले रामवृक्ष जयगुरुदेव का चेला बना। बाबा की दूरदर्शी पार्टी से इसने लोकसभा और विधानसभा का चुनाव भी लड़ा। लेकिन एक दिन किसी ने इसकी हरकतों की शिकायत गुरूदेव से कर दी। तो जयगुरूदेव ने सार्वजनिक रूप से इसे सजा देते हुए इसके टाट के कपड़े उतरवाकर इसे अपने शिष्य पद से हटा दिया। 

इसके बाद इसने अपना स्वाधीन भारत नाम से संगठन बनाया। खुद नेता बन गया और अपने चेले चपाटों की एक नई फौज खड़ी की, और कुछ लोगों को लोकसभा और विधानसभा का टिकट भी दिया। अपने समर्थकों के बीच सामानांतर सरकार चलाने वाला रामवृक्ष यादव हजारों की भीड़ में लोगों को कैसे भड़काता था इसके कई वीडियो सामने आए हैं। 

रामवृक्ष की कला थी इसके भाषण। ये अपने उग्र भषणों से लोगों को भड़काता था। मथुरा के जवाहर बाग में दो साल से धरने के नाम पर कब्जा जमाए बैठा रामवृक्ष यादव रोज शाम को अपने समर्थकों के बीच बोलने के लिए खड़ा होता था। फिर निशाना साधता था देश के नेताओं पर। 

रामवृक्ष के बारे में एक जानकारी ये भी मिली है कि मथुरा से पहले वह बरेली और कानपुर में भी बवाल करा चुका है। बरेली में पुलिस ने उसे खदेड़कर भगा दिया था तो कानपुर में आम लोगों ने ही उसे जमकर पीटा था। उसके बाद उसने मथुरा में आकर डेरा डाल लिया।