... तो भारत के दुश्मन नं. 1 मौलाना मसूद अजहर को इसलिए चीन आतंकी नहीं मानता

संजीव त्रिवेदी, नई दिल्ली (22 अप्रैल): पिछले दिनो भारत का दुश्मन नंबर एक मौलाना मसूद अजहर संयुक्त राष्ट्र में चीन की दखल की वजह से अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित होने से बच गया। लेकिन भारत ने हार नहीं मानी और चीन को समझाने के लिए लगातार कोशिश में जुटा है। लेकिन अब चीन ने वो राज जाहिर कर दिया है जिसकी वजह से मसूद अजहर पर उसने भारत नहीं पाकिस्तान का समर्थन करने का कदम उठाया है। 

आखिर क्या है वो वजह कि भारत के दुश्मन नंबर वन मौलाना मसूद अजहर को चीन आतंकी नहीं मानता। भारत ने इसे समझने की ताबरतोड़ कोशिशें शुरु कर दी हैं। एक के बाद एक सरकार के तीन आला नुमाइंदों ने ये सवाल चीन के मंत्रियों और अधिकारियों के सामने उठाए हैं। 

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अजहर पर चीन के वीटो को लेकर मास्को में चीन के विदेश मंत्री वैंग ई से 18 अप्रैल को ये सवाल किया तो रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने उसी दिन अपनी बीजिंग यात्रा में चीनी रक्षा मंत्री वेन क्वेन से चीन के स्टैंड पर भारत की नाराजगी जाहिर कर डाली। लेकिन सच का खुलासा हुआ इसी सप्ताह बीजिंग की यात्रा पर गए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी स्टेट काउंसलर यांग जीची की मुलाकात के दौरान। 

अजीत डोभाल के सामने ये साफ कर दिया गया कि चीन मसूद अजहर को आतंकी होने के बावजूद अगर जानबूझकर आतंकी नहीं मानता तो उसके पीछे हैं- डोलकन ईसा। ये वो नाम है जो चीन के लिए वहीं अहमियत रखता है जो मसूद अजहर भारत के लिए रखता है। इस एक नाम ने मसूद अजहर के सवाल पर चीन और पाकिस्तान को और करीब ला दिया है।

चीन की शिकायत है कि डोलकन ईसा चीन का भगोड़ा आतंकी है। चीन के उत्तर पश्चिम में बसे सींकियांग सूबे को चीन से अलग कर पूर्व तुर्किस्तान बनाने के सपने देखने वाले विद्रहियों में वो सबसे आगे है लेकिन चीनी सरकार के इस घोषित आतंकी को भारत ने 28 अप्रैल को धर्मशाला में हो रहे उस चीन विरोधी कान्फ्रेस में भाग लेने के लिए वीजा दे दिया है जिसमें मुख्य वक्ता चीन के दूसरे विरोधी दलाई लामा हैं। उधर 

भारत की दलील ये है कि डोलकन ईसा चीनी मुसलमानो के हक के लिए लड़ रहा है। उसे जर्मनी ने राजनीतिक शरण दे रखी है जहां वो 1997 से रह रहा है। चीन की शिकायत है कि डोलकन ईसा ने बीजिंग में आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया है और उसके खिलाफ चीनी सरकार ने इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी करवाया है। चीन और भारत की तकरार की सबसे ताजा वजह है डोलकन ईसा और उसपर हुई अनबन से सीधा फायदा मसूद अजहर को हो रहा है।  

मई के महीने में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं। भारत सरकार की कोशिश है कि तबतक मसूद अजहर पर दोनो देशों के बीच जारी गतिरोध खत्म हो जाए। लेकिन तमाम दूसरी वजहों के अलावा डोलकन ईसा को वीजा दिए जाने के सवाल पर चीन की नाराजगी ऐसी है की भारत चीन को मसूद अजहर के सवाल पर तीन-तीन हाई प्रोफाइल यात्राओं के बावजूद मना नहीं पा रहा है।