VIDEO : धरती में समा रहा है एक शहर, शिफ्ट किया जाएगा 3 किलोमीटर दूर

नई दिल्ली (25 मई) : दस साल पहले स्वीडन के माइनिंग शहर किरुना ने बड़ा फैसला किया। इस शहर की आबादी 18,000 है। इस शहर के नीचे लोहा अयस्क (आयरन) बहुतायत में है। इस अयस्क के दशकों से खदन के चलते शहर के नीचे बड़ी दरारें हो गई हैं। ये दरारें इतनी बड़ी हो चुकी हैं कि पूरे शहर के ही धरती में समा जाने का खतरा हो गया है। इससे बचने का एक ही रास्ता था कि शहर को पूर्व दिशा में 3 किलोमीटर की दूरी पर शिफ्ट कर दिया जाए।  

'द इंडिपेंडेंट' की रिपोर्ट के मुताबिक 2004 में सरकारी एजेंसी लुओसावारा किरुनावारा एक्टिबोलाग (एलकेएबी) ने शहर और खदान को बचाने के लिए 2 अरब डॉलर की इस परियोजना को अपने हाथ में लिया। एलकेएबी के पास खुद खदान का स्वामित्तव है। किरुना की एक्ज़ीक्यूटिव कमेटी के वाइस चेयरमैन निकलास सिरेन का कहना है कि किरुना शहर और खदान की अलग अलग कल्पना भी नहीं की जा सकती।

इसी शहर को शिफ्ट किए जाने पर स्वीडन सरकार की ओर से एक नया वीडियो रिलीज़ किया गया है। इसमें फिल्मकार जोहान संडबर्ग और हेनरिक कार्कस्टेड्ट किरुना जाकर वहां का मुआयना कर रहे हैं और लोगों से बात कर रहे हैं। वे लोगों से ये पूछते नज़र आते हैं कि आप क्यों शहर को शिफ्ट करना चाहते हैं और ये कैसे होगा। उन्होंने शहर में 1933 से स्थित एक स्टोर की मालकिन जोहाना से बात की। जोहाना ने कहा, "वो शहर को यहां से हटा रहे हैं और हमें उनका कहना मानना होगा। हम अपने स्टोर के साथ मूव करेंगे।"

जोहाना की दुकान समेत किरुना की ज्यादातर इमारतें गिरा कर दोबारा बनाई जाएंगी। लोगों को उनके  घर-दुकानों के लिए सेल प्राइज़ से 25 फीसदी अधिक कीमत दी जाएगी। जिससे वो नए शहर में घर खरीद सकें। अगर वो ऐसी डील नहीं करते हैं तो उनके पास नए शहर में मुफ्त घर पाने का भी प्रावधान है।

वैसे किरुना शहर में तीन ऐसी इमारतें हैं जिन्हें गिराया नहीं जाएगा। इसकी जगह इन्हें सावधानी के साथ डिस्मैंटल कर नई जगह पर दोबारा असेंबल किया जाएगा। इन इमारतों में किरुना चर्च भी शामिल है। इस चर्च को स्वीडन की सबसे खूबसूरत इमारत के तौर पर एक बार वोट किया गया था।  

शहर को शिफ्ट करना आसान प्रक्रिया नहीं है, लेकिन आर्किटेक्ट मार्क शुलगिट का कहना है कि इसके बहुत मायने है। उन्होंने कहा कि हमारे सामने बड़ी चुनौती ये नहीं है कि नए शहर का डिजाइन आकर्षक, आधुनिक और टिकाऊ हो बल्कि हमारे सामने बड़ी चुनौती ये है कि लोगों के माइंडसेट को कैसे मूव किया जाए, कल्चर को कैसे मूव किया जाए।

जोहाना भी उनकी बात से सहमत है। उनका कहना है कि ये वो शहर है जहां वे पैदा हुई और बड़ी हुई। उनके लिए महत्वपूर्ण ये होगा कि नए शहर में आसपास का माहौल वैसा ही रहे जैसा कि आज है बल्कि इससे भी बेहतर हो। 

देखें वीडियो-

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