'सोने के सिक्के बिछाकर होली खेलता ये राजा'

नई दिल्ली (10 मार्च): कई बार इतिहास में कुछ ऐसी बातें भी होती हैं जो जनता को बरबस अपनी ओर खींच ही लेती हैं। ऐसा ही कुछ नजारा जयपुर राज्य की होली का भी होता था। यहां के राजा माधोसिंह द्वितीय ने वर्ष 1903 में होली के त्योहार पर वृंदावन में ब्रह्मचारी मंदिर के गर्भ गृह आंगन में सोने की हजारों अशर्फियां बिछाकर दान की थीं। मंदिर के संत गोविंदराम महाराज ने टोंक रिसाले के सैनिक माधोसिंह को जयपुर का महाराजा बनने का आशीर्वाद दिया था।

 

महाराजा द्वारा स्वर्ण अशर्फियां बिछाने की देश विदेश में खासी चर्चा रही। माधोसिंह होली का त्योहार उत्साह से मनाते। जनता के साथ होली खेलने के बाद वे जनाना महलों में महारानियों व पड़दायतों की महफिल में शामिल होते। रिकार्ड के मुताबिक वर्ष 1913 में माधोसिंह ने अपना अधिकांश समय जनाना महलों की होली के उत्सव में बिताया। उनकी इस महफिल में नृत्यांगनाएं संगीत व नृत्य की महफिल में चार चांद लगा देती। सतरंगी मदनोत्सव की रस भरी राजसी धुलण्डी पर गुलाल अबीर के रंगों की सुगंध का दरिया बह उठता। कामकाज के लिए भागती दावडिय़ों के रेशमी घाघरों की सरसराहट गलियारों में सुनाई देती।