D कंपनी ने की थी पेशकश, हिंदू नेताओं को मारो, मिलेगी नौकरी

नई दिल्ली(8 मई): अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ने हिंदू नेताओं को निशाना बनाने के एवज में दक्षिण अफ्रीका में नौकरी की पेशकश की थी। दाऊद का मकसद 2002 के गुजरात दंगों में भूमिका निभाने वाले हिंदू नेताओं और कथित मुस्लिम विरोधियों को निशाना बनाना था। भारत में सांप्रदायिक तनाव फैलाने के लिए डी कंपनी नए रंगरूटों की भर्ती में इस तरह के प्रलोभन दिया करती थी।

एक अंग्रेजी वेबसाइट की रिपोर्ट में इसका दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक दाऊद ने मोदी सरकार को कमजोर करने के लिए सामाजिक तनाव फैलाने की साजिश रची थी। अहमदाबाद की एक कोर्ट में डी-कंपनी के 10 गुर्गों के खिलाफ एनआईए की ओर से दायर आरोप पत्र में हिंदू नेताओं पर हमला करने की साजिश का आरोप है।

इसी साजिश के तहत भाजपा के पूर्व प्रमुख भरूच शिरीष बंगाली और भाजपा के यूथ विंग के नेता प्रग्नेश मिस्री के कत्ल को अंजाम दिया गया था। मिस्री की हत्या पिछले साल की गई थी। एनआईए के मुताबिक डी-कंपनी के आकाओं ने भारत में अपने गुर्गों को सराब की खाली बोतलों में बनाए गए पेट्रोल बम फेंकने और चर्चों को आग लगाने के लिए कहा था। इसका मकसद सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा करना था। एनआईए की चार्जशीट में साफ तौर पर कहा गया है कि डी-कंपनी ने जावेद चिकना के जरिए भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल के नेताओं को निशाना बनाने की साजिश रची थी। हमलों को अंजाम देने के लिए जावेद चिकना ने 50 लाख रुपए की रकम हवाला के जरिए दुबई से गुजरात भेजने का इंतजाम किया था। मुंबई और सूरत में हथियारों का इंतजाम भी जावेद ने ही अपने संपर्कों के जरिए कराया था।

मिस्री और बंगाल की हत्या को अंजाम देने के लिए इसी रकम में से 5 लाख रुपए का भुगतान किया गया था। इस केस में एनआईए ने आबिद पटेल,सैयद इमरान,जुहेब अंसारी,इनायत पटेल,मोहम्मद युनूस,हैदर अली,निसार भाई शेख,मोहसिन खान पठान,मोहम्मद अल्ताफ शेख और अब्दुल सलीम घांची को आरोपी बनाया गया है। आबिद पटेल दाऊद के करीबी जावेद पटेल उर्फ चिकना का भाई है। जावेद पाकिस्तान से ही अपनी गतिविधियों को अंजाम देता है।