'केरल में बीजेपी, आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या के लिए सीएम विजयन जिम्मेदार'

नई दिल्ली(3 अक्टूबर): बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह मंगलवार को केरल के पयन्नूर में राज्य की सीपीएम सरकार और मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब से राज्य में कम्युनिस्ट सरकार सत्ता में आई है, तब से राजनीतिक हिंसा का दौर शुरू हो गया है। राज्य में 120 से ज्यादा बीजेपी का

- उन्होंने केरल के सीएम विजयन पर भी सीधा हमला बोला और कहा कि वे जितना भी हिंसा फैलाएंगे, राज्य में उतना ही कमल खिलेगा। उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी को आत्ममंथन की सलाह दी। अमित शाह ने बीजेपी की जनरक्षा यात्रा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि जनरक्षा यात्रा केवल केरल के कार्यकर्ताओं की नहीं, देश के 11 करोड़ बीजेपी कार्यकर्ताओं की यात्रा है।

-उन्होंने कहा, 'जब से यहां कम्युनिस्ट सरकार केरल में आई है, तब से 13 कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है। इसके विरोध में हम यह यात्रा निकालने जा रहे हैं। आज से लेकर 17 अक्टूबर तक जनरक्षा यात्रा केरल के विभिन्न जगहों तक जाएगी। यह कम्युनिस्ट हिंसा के खिलाफ केरल की जनता को एकजुट करेगी।' 

-उन्होंने बताया कि केरल के कार्यकर्ता जब यात्रा लेकर निकलेंगे तो कोई न कोई केंद्रीय मंत्री या केंद्रीय नेता इस शहीद मार्च में शामिल होंगे। दिल्ली में भी 16 अक्टूबर तक बीजेपी के कार्यकर्ता सीपीएम के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे। साथ ही हर राज्य की राजधानी में एक दिन यात्रा निकालकर कम्युनिस्ट हिंसा का विरोध करेंगे। 

-शाह ने बताया कि इस यात्रा कन्नूर से निकालने का खास मकसद है। यह जिला केरल के सीएम पिनरायी विजयन का है और यहां वाम सरकार बनने के बाद सबसे ज्यादा हिंसा हुई है। उन्होंने कहा 'केरल शांति की धरती है लेकिन आज यह भूमि रक्तरंजित हो गई है। जब से केरल में कम्युनिस्ट सरकार सत्ता में आई है, तब से राजनीतिक हिंसा शुरू हो गई है। जब से केरल में लेफ्ट गठबंधन की सरकार सत्ता में आती है, हिंसा बढ़ गई है। केरल के सीएम के जिले में 84 लोगों की हत्या कर दी गई है। इसकी जिम्मेदारी राज्य की कम्युनिस्ट सरकार की है।' 

-उन्होंने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर भी निशाना साधा। शाह ने कहा, ' मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से से कहना चाहता हूं कि वे सिलेक्टिव न हों और केरल में हिंसा पर भी आवाज बुलंद करें।' उन्होंने सवाल किया कि मानवाधिकार कार्यकर्ता केरल की हिंसा के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठाते हैं। उन्होंने कहा, 'हिंसा का कोई रंग नहीं होता, मानवाधिकार कार्यकर्ता इसमें भेद न करें।'