कश्मीर में युवाओं की जिंदगी बदल रही है ये लड़की

श्रीनगर(5 अगस्त): कश्मीर में आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद पत्थरबाजी की घटनाओं में बढोतरी हुई। एक तरफ जहां पत्थरबाज सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंकते तो वहीं एक ऐसी लड़की भी है जो युवाओं की जिंदगी बदलने का प्रयास कर रही है।  

- श्रीनगर की रहने वाली 23 वर्षीय कुदसिया अल्ताफ कश्मीर यूनिवर्सिटी के मैदान पर युवाओं को फुटबॉल के हुनर सिखा रही हैं। कुदसिया रोज शाम को 3.30 बजे से 6.30 तक यहां आकर बच्चों को फुटबॉल खिलाड़ी बनाने के लिए तैयार कर रही हैं। 

- कुदसिया रोजाना इन युवाओं को फुटबॉल के खेल की बारिकियां सिखाती हैं। 'हैदर, इलियास, फैजन, यहान आ जाओ बेटा। थोड़ा गैप रखो, वॉर्म अप करो, फिर कम से कम 5 बार बॉल पासिंग की प्रैक्टिस करो।' यह उनका डेली रूटीन है। 

- कुदसियाने अपनी सिविल इंजिनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर, घाटी को कुछ सकारात्मक देने पर विचार किया। कुदसियायहां उजाड़ हो चुके लोगों को मरहम लगाना चाहती थीं। इसके बाद उन्होंने पटियाला के नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स में कोच बनने के लिए जॉइन किया।

- वह यहां ट्रेनिंग लेकर खुद को बतौर कोच खुद को उस खेल के लिए तैयार करना चाहती थीं, जिसे वह दिलोजान से चाहती हैं। कुदसिया 2007 से फुटबॉल खेल रही हैं। उन्हें इस बात का मलाल है कि जिला स्तर तक खेलने के बावजूद कभी भारतीय फुटबॉल टीम का हिस्सा नहीं बन पाईं। लेकिन अब वह अपनी टीम तैयार कर उसे इंटरनैशनल स्तर तक ले जाना चाहती हैं। 

- कुदसिया कहती हैं, 'अब मेरा सपना यही है कि ये लड़के भारतीय फुटबॉल टीम का हिस्सा बनें और इंटरनैशनल लेवल पर भारत का नाम रोशन करें। मैं इन्हें बंदूक, पत्थरबाजी, ड्रग और स्मोकिंग जैसी बुरी चीजों से दूर रखना चाहती हूं। यहां इनके पास अपने देश का नाम रोशन करने के लिए सुनहरा मौका है।'

- कुदसिया बताती हैं कि यहां कभी यहां करीब 3 दर्जन लोग पत्थरबाज थे। अब वे सभी अच्छे और सुधर चुके लोग हैं, जो मेरे पास आते हैं। वे सभी भारत के लिए अच्छा करना चाहते हैं। कुदसिया फुटबॉल कोचिंग के साथ अपनी शिक्षा भी जारी रख रही हैं। इंजिनियरिंग छोड़ने के बाद अब वह इंटीरियर डिजाइनिंग में ग्रेजुएशन करना चाहती हैं। वह जम्मू-कश्मीर स्टेट स्पोर्ट्स काउंसिल से जुड़कर बेहद उत्साहित हैं और इस काम को मजबूत करना चाहती हैं।