सेना को सलाम- कश्मीर में पत्‍थरबाजी के बीच, आतंकियों पर मौत बनकर टूट रहे हमारे जवान

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (28 मार्च): कश्मीर को एक बार फिर हिंसा की आग में झोंकने की साजिश रची जा रही है। शांत कश्मीर में एक बार फिर अशांति की चिंगारी सुलगाने की कोशिश की जा रही है। मुठीभर आतंकियों के मददगार देशद्रोही 'पत्थरबाज' दोबारा सड़कों पर आम कश्मीरियों की आड़ में उतर आए हैं। इनकी वजह से कश्मीर में सेना को एक अजीबोगरीब हालात से जूझना पड़ रहा है। एक ओर हमारे जवान बरसती गोलियों के बीच आतंकियों से लोहा ले रहे हैं तो दूसरी ओर इन देशद्रोहियों के पथराव का भी सामना कर रहे हैं। ऐसा ही कुछ हुआ मंगलवार को कश्मीर के बडगाम में। बडगाम में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच जारी मुठभेड़ के बीच कुछ देशद्रोहियों ने आतंकियों के समर्थन में पत्थरबाजी की ताकि आतंकियों को भागने का मौका मिल जाए। लेकिन हमारे जांबाज जवानों ने इस पत्थरबाजी के बीच एक आतंकी को मौत के घाट उतार दिया जबकि दूसरे से मठभेड़ जारी है। दूसरी तरफ देशद्रोही पत्थरबाजों पर जवाबी कार्यवाही में दो पत्थरबाज मारे गए जबकि 17 जख्मी हैं। ऐसा ही घटना रविवार को भी घटी थी जब सेना ने हिजबुल मुजाहिद्दीन के दो आतंकियों को मार गिराया था जिसके विरोध में कुछ लोग सड़कों पर उतर आए थे और सड़क जाम कर सेना की गाड़ी पर पथराव किया था। लेकिन जैसे ही सेना ने कड़ा रूख दिखाया पत्थरबाज वहां से भाग उठे।


आर्मी चीफ ने दी थी चेतावनी 'पत्थर चलाओगे तो गोली खाओगे'- शांत कश्मीर को अशांत करने वाले पत्थरबाजों को सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने 16 फरवरी को कड़ी चेतावनी दी थी। सेना प्रमुख ने साफ-साफ शब्दों में कह दिया है कि कश्मीर में अगर पत्थर चलाओगे तो गोली खाओगे। जनरल रावत कि ये कड़ी चेतावनी घाटी में उन लोगों के लिए भी है, जो आतंकियों के खिलाफ सेना के ऑपरेशन में बाधा डालते हैं। ये मुठीभर आतंकियों के मददगार पत्थरबाज आम कश्मीरियों की आड़ में उतर आते हैं। जिसकी वजह से जवानों को एक अजीबोगरीब हालात से जूझना पड़ता है।


इन देशद्रोहियों का कश्मीर और कश्मीरियत से कोई लेना-देना नहीं- इन देशद्रोहियों का मकसद हिंसक प्रदर्शन और पत्थरबाजी से सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाना और आतंकियों की मदद करना रहता है। सुरक्षा बलों का भी कहना है कि हाल के महीनों में आतंकियों से हमदर्दी रखने वाले ऐसे लोगों की तादाद में इजाफा हुआ है। जाहिर है आतंकवाद से निपटने में तब तक कामयाबी नहीं मिलेगी, जब तक इन देशद्रोहियों की पहचान कर स्थानीय लोगों से अलग नहीं किया जाएगा। साथ ही स्थानीय लोगों का विश्वास नहीं जीता जाएगा। लेकिन फिलहाल केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही इसमें असफल दिख रहे हैं। घाटी के युवाओं को पाकिस्तान के आतंकी सरगना बहलाने में कामयाब हो रहे हैं। जब तक इसको नहीं रोका जाएगा तब तक घाटी में अमन और शांति लाना मुश्किल है।


जम्मू-कश्मीर सरकार जारी कर चुकी है एडवाइजरी- जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने स्थानीय लोगों की तरफ से सुरक्षाबलों पर की गई पत्थरबाजी की निंदा की। उन्होंने कहा कि आतंकियों को लेकर यहां के लोगों में जो समर्थन है वह चिंताजनक है। मुफ्ती सरकार ने आम लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर 16 फरवरी को एक एडवाइजरी भी जारी की थी। जिसमें प्रशासन ने लोगों से आतंकवाद के खिलाफ अभियान वाली जगहों से दूर रहने को कहा था। यह एडवाइजरी आर्मी चीफ के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ अभियानों में रुकावट डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी। श्रीनगर, बड़गाम और शोपियां जिले जो जिहादी गुटों का अड्डा माने जाते हैं में निर्देश दिए हैं कि नुकसान से बचने के लिए लोग उन जगहों के करीब ना जाएं जहां सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हो रही हो।


कश्मीर में विश्वास बहाली का फायदा उठा रहे देशद्रोही...

    * पत्थरबाजों के प्रति बरती जा रही नरमी सुरक्षा बलों पर भारी पड़ रही है।

    * आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद भड़की हिंसा में कई पत्थरबाज हुए थे गिरफ्तार।

    * पांच माह तक कश्मीर में उपद्रव के दौरान गिरफ्तार अधिकांश पत्थरबाज रिहा हो चुके हैं।

    * कम उम्र के 4506 पत्थरबाजों से मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया जारी है।

    * लेकिन इस बीच ताजा हिंसा में सुरक्षा बलों के 100 से अधिक जवान घायल हो गए।

    * अभीतक पत्थरबाजी के कारण 6 हजार से ज्यादा जवान घायल हो चुके हैं।

    * सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2016 में हिंसा की 3,404 वारदातें दर्ज की गईं।

    * आंकड़ों के मुताबिक 2016 में आगजनी की 267 वारदातें हुईं थी।

    * कश्मीर में पत्थरबाजी की 2,690 वारदातें रिकॉर्ड की गईं। 

    * नॉर्थ कश्मीर में 1248, साऊथ और सेंट्रल कश्मीर में 875 और 567 रिकॉर्ड हुई।

    * बारामूला के सोपोर में पथराव की 490 वारदातें हुईं।


300 सक्रिय आतंकियों को बचाने में लगे हैं ये देशद्रोही...

    * खुफिया सुत्रों के मुताबिक घाटी में 300 आतंकी सक्रिय हैं।

    * इन आतंकियों ने ग्रामीण इलाकों में शरणस्थली बनाया हुआ है।

    * ये आम जनता में घुल-मिल जाते हैं जिससे इनका पता नहीं लगता।

    * जब सर्च ऑपरेशन चलाया जाता है तो आतंकी बचने के लिए फायरिंग करते हैं।

    * आतंकियों को बचाने के लिए ये देशद्रोही सुरक्षा बलों को पत्थरों से निशाना बनाते हैं।


14 फरवरी को पत्‍थरबाजी के बीच एक-एक आतंकी पर मौत बनकर टूटे हमारे जवान- उत्तरी कश्मीर में मंगलवार 14 फरवरी को बांदीपुरा और हंदवाड़ा में दो भीषण मुठभेड़ हुई। जिसमें लश्कर के खूंखार आतंकी अबु हारिस समेत चार दहशतगर्दो को ढेर किया। मुठभेड़ में सेना के एक मेजर व जम्मू के एक जवान सहित चार सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए। बांदीपुरा के हाजिन में जिस वक्त आतंकियों के साथ सेना की मुठभेड़ चल रही थी उसी वक्त वहां पत्थरबाजी हो रही थी जिसका वीडियो भी सामने आया था। वीडियो में देखा जा सकता है कि ये देशद्रोही सेना के काफिले पर पत्थरबाजी करते दिखाई दे रहे थे। लेकिन हमारे वीर जवानों ने इन पत्थरबाजों की चिंता किए बगैर एक-एक आतंकी को चुन-चुन कर मार डाला।