INSIDE STORY: #Kashmir जानिए कौन हैं 'कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत' के दुश्मन...

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (5 सितंबर): कश्मीर में लगातार 58 दिनों से कर्फ्यू और प्रतिबंध जारी हैं। दक्षिणी कश्मीर में अभी भी तनाव बना हुआ है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में 20 दलों के 30 नेताओं का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कश्मीर के दो दिन के दौरे पर हैं। एक तरफ घाटी को शांत करने के लिए प्रतिनिधिमंडल अलग अलग लोगों से मुलाकात कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ हुर्रियत जैसे अलगाववादी संगठन युवाओं को हिंसा के लिए भड़काने का काम कर रहा है। आज गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ये अलगाववादी, 'कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत' में यकीन नहीं करते। जानिए कौन हैं ये अलगाववादी और क्यों फैला रहे हैं कश्मीर में हिंसा...

अलगाववादियों को मिल रही है पाकिस्तान से मदद...

- 8 जुलाई को हिजबुल कमांडर बुरहान के मारे के बाद अलगाववादियों ने युवाओं को भड़काया।  - पाकिस्तान परस्त अलगाववादी जो आए दिन घाटी में पत्थरबाजी और हड़ताल करवाते हैं। - कश्मीर के गरीब और युवा बेरोरगारों को यही अलगाववादी भड़काते हैं।  - खुफिया एजेंसियों ने पता लगाता कि पाकिस्तान ने इन्हे फंडिंग की जा रही है। - एनआईए ने 17 बैंक खातों का पता लगाया जिसमें पाक से 38 करोड़ रुपए की फंडिंग हुई। - अलगाववादियों की साजिश घाटी को 90 के दशक जैसा बनाने की है। - 90 के दशक के बाद घाटी में पहली बार आतंकी सरेआम कर रहे हैं रैलियां। - साउथ कश्मीर में आतंकी रैलियां कर लोगों को साथ आने के लिए धमका रहे हैं। - 1 अगस्त को लश्कर कमांडर अबू दुजाना नकाब पहनकर पुलवामा की रैली में पहुंचा। - 2 अगस्त को कुलगाम में दो आतंकियों ने और 3 अगस्त को अनंतनाग में 3 आतंकियों ने रैली की।  - 19 अगस्त को साउथ कश्मीर के कुलगाम इलाके में चार आतंकियों ने रैली की। - अलगाववादियों के डर की वजह से दो पुलिसकर्मियों ने इस्तीफा दे दिया। - घाटी के 36 में से 33 थाने फिलहाल बंद हैं, पुलिसकर्मियों ने सेना के बैरकों में शरण ले रखी है।

कौन हैं ये अलगाववादी... क्यों फैला रहे हैं कश्मीर में हिंसा...

कश्मीर में 1989 से अलगाववादी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। जब पाकिस्तान भारत को तीन युद्धों में नहीं हरा पाया तो उसने भारत के खिलाफ छद्म युद्ध (Proxy War) की शुरूआत की। भारत के खिलाफ हिंसक आंदोलनों को बढ़ावा दिया गया। कश्मीरी युवाओं को भारत के खिलाफ भड़काया गया। पाकिस्तान ने दोहरी चाल चलते हुए एक तरफ पाकिस्तान ने आतंकवाद को पाला-पोसा तो दूसरी तरफ कश्मीर में अलगाववादियों को बढ़ावा दिया। कश्मीर में रोजाना हिंसक प्रदर्शन होने लगे। कश्मीरी पंडितों की हत्या की जाने लगी। घाटी में चारों ओर एके-47 लहराती नजर आने लगीं। 3 लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडितों को अलगाववादियों ने अपना घर, जमीन, व्यापार सबकुछ छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया। 23 अलग-अलग अलगाववादियों ने मिलकर 1993 में संगठन बनाया 'हुर्रियत कॉन्फ्रेंस'। गठन के दो साल के भीतर ही अलगाववादियों में भी मतभेद होने लगे मीरवायज उमर फारुक, प्रोफेसर अब्दुल गनी भट और बिलाल लोन जैसे नेता मुख्यधारा में शामिल होना चाहते थे। लेकिन कट्टरपंथी धड़े की कमान संभालने वाले सैय्यद अली शाह गिलानी को यह मंजूर नहीं था।

उदारवादी बिखरे, कट्टर नेताओं की बढ़ी ताकत...

- अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में 22 जनवरी 2004 को दिल्ली के नॉर्थब्लाक तक हुर्रियत नेता पहुंचे थे।  - मनमोहन सिंह के दौर में हुर्रियत नेताओ को पाकिस्तान जाने का वीजा दिया गया।  - इससे उदारवादी गुट के नेात मीरवाइज ने भारत सरकार के साथ परदे के पीछे शुरू की गई बातचीत में भाग लेने की इच्छा जताई। - मीरवाइज मौलवी उमर फारूक के इस प्रस्ताव का सैयद अली शाह गिलानी जैसे कट्टर नेताओं ने विरोध किया। - नवंबर 2009 में अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारुक ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की सभी समितियों को भंग कर दिया। - 2014 में शबीर शाह ने मीरवाइज का साथ छोड़ते हुए एक अलग पार्टी जम्मू-कश्मीर हुर्रियत कांफ्रेंस का निर्माण किया। - बाद में 2015 में शाबिर शाह, नईम खान ने हुर्रियत के गिलानी गुट का दामन थाम लिया। - शब्बीर अहमद शाह डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी और नईम खान की नेशनल फ्रंट का विलय गिलानी की अगुवाई वाली हुर्रियत कॉन्फ्रेंस में हो गया। - अप्रैल 2015 में ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के उदारवादी गुट (मीरवाइज) में दूसरा विभाजन हो गया है - मीरवाइज से अलग हुए इन अलगाववादियों में पूर्व हिज्ब कमांडर व सॉल्वेशन मूवमेंट के चेयरमैन जफर अकबर फतेह,  - पूर्व जेकेएलएफ कमांडर जावेद अहमद मीर के अलावा मुस्लिम ख्वातीन मरकज की यासमीन रजा,  - पीपुल्स लीग के याकूब शेख, सलीम गिलानी, हकीम रशीद व बशीर अंद्राबी शामिल थे। - आज स्थिती यह हो गई है कि अपने घड़े को बचाने और पाकिस्तान से नजदीकी दिखाने के लिए मीरवाइज की रैली में भारत विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं। - हुर्रियत की सियासत पर नजर रखने वालों ने बताया यह विभाजन पूरी तरह पाकिस्तान के दबाव में हुआ था।  - दूसरी तरफ हुर्रियत नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश में जुटा रहा पाक उच्चायोग।  - पाक उच्चायुक्त अब्दुल बासित भारत के विरोध के बावजूद गिलानी, लोन और मीरवाइज से अलग-अलग मिलते रहे। - नतीजतन मीरवाइज को झुकना पड़ा, 11 जुलाई 2015 को 12 साल बाद सभी अलगाववादी एक मंच पर आए। - कट्टरपंथी गुट के गिलानी, उदारवादी गुट के उमर फारूक और जेकेएलएफ के यासीन मलिक दावत-ए-इफ्तार पर इक्कठा हुए। - लेकिन पाक उच्चायोग की तमाम कोशिशों के बावजूद बिलाल गनी लोन, अब्दुल गनी बट, मौलाना अंसारी, हिलाल वार, शब्बीर शाह इसमें शामिल नहीं हुए।

कश्मीर के बच्चों से पत्थर फिंकवाते हैं और अपने बच्चों को विदेशों में पढ़ाते हैं...

सैय्यद अली शाह गिलानी (हुर्रियत नेता)- गिलानी का बडा बेटा नईम तथा बहू बजिया पाकिस्तान के रावलपिंडी में डॉक्टर हैं। छोटा बेटा जहूर परिवार के साथ दिल्ली में रहता है। पोता इजहार दिल्ली में एक प्राइवेट एयरलाइन्स कंपनी में काम करता है। बेटी फरहत जेद्दा में रहती है। टीचर है। भाई गुलाम नवी लंदन में रहता है।

यासीन मालिक (हुर्रियत नेता)- दूसरी मुस्लिम महिलाओं के लिए इस्लामिक ड्रेस कोड का सपोर्ट करते हैं, पर पत्नी के साथ ट्रेन्डी आउटफिट में घुमते हैं। 2015 में यासीन मलिक और पत्नी मुशहाला का फोटो सोशल मीडिया पर हुआ था वायरल।

मीरवाइज उमर फारूक (हुर्रियत नेता)- अमेरिकी मूल की मुस्लिम शीबा मसदी से शादी की है। एक बेटी है, जो मां के साथ अमेरिका में ही रहती है। बहन राबिया फारूक अमेरिका में डॉक्टर है।

मसरत आलम (हुर्रियत नेता)- उसके दो बेटे हैं। दोनों की उम्र कम है। वह श्रीनगर के ही एक बड़े स्कूल में पढाई करते हैं। मसरत 2008-10 में प्रदर्शनों का मास्टरमाइंड रहा है।

आसिया अंद्राबी (दुख्तरान ए मिल्लत)- आसिया अंद्राबी के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा मोहम्मद बिन कासिम मलेशिया में मौसी के साथ रहता है। मौसी वहीं नौकरी करती है। वह बैचलर ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का कोर्स कर रहा है। छोटा बेटा श्रीनगर में पढ़ाई कर रहा है। एक भतीजा पाकिस्तानी सेना में कैप्टन तथा दूसरा इस्लामाबाद यूनिवर्सिटी में नौकरी करता है।

फरीदा (दुख्तरान ए मिल्लत)- महिला अलगावादी नेता फरीदा का बेटा रूमा मकबूल साउथ अफ्रीका में डॉक्टर है। 2014 के चुनावों मे फरीदा को गिरफ्तार कर लिया गया था।