इमरान की चापलूसी में फंसे ट्रंप, अब अमेरिकी विदेश मंत्रालय को देनी पड़ रही है सफाई

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (23 जुलाई): आर्थिक रुप से कंगाल और दुनियाभर के लिए आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगार बने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इन दिनों अमेरिका के दौरे पर है। पैसे-पैसे की लिए मोहताज पाकिस्तान को आर्थिक संकट से उबारने के लिए इमरान खान दुनियाभर के देशों के सामने अपनी झोली फैला रही है। इसी कड़ी में इमरान खान अमेरिका पहुंचे हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भीख के लिए चापलूसी में जुटे हैं। पाकिस्तान झूठ बोलने के लिए दुनियाभर में जग जाहिर है और इमरान खान की संगत असर बड़बोले डोनाल्ड ट्रंप पर भी दिखने को मिला है। इमरान खान की संगत में आते ही डोनाल्ड ट्रंप भी झूठ बोलने लगे। कश्मीर को लेकर बड़बोले डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा बयान दे दिया जिसपर अब उनके ही विदेश मंत्रालय को सफाई देते नहीं बन रही है।

दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान इमरान खान ने डोनाल्ड ट्रंप से कश्मीर मुद्दे पर दखल देने की मांग की। इमरान खान ने कहा, 'मैं प्रेजिडेंट ट्रंप से कहना चाहता हूं कि अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश है और वह उपमहाद्वीप में शांति में अहम योगदान दे सकता है। कश्मीर मुद्दे का समाधान दे सकता है। मेरा कहना है कि हमने भारत के साथ बातचीत को लेकर हर प्रयास किया है।' इस पर जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा, 'दो सप्ताह पहले पीएम नरेंद्र मोदी से मेरी बात हुई थी। हमारी इस मुद्दे पर बात हुई थी और उन्होंने कहा था कि क्या आप मध्यस्थ हो सकते हैं। यह मुद्दा बीते 70 साल से लटका हुआ है और हमें खुशी होगी यदि हम इसमें कोई मध्यस्थता कर सके।' ट्रंप ने कहा कि इस मुद्दे का हल होना चाहिए। कश्मीर दुनिया के सबसे खूबसूरत इलाकों में से एक है, लेकिन हिंसा से जूझ रहा है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय भी भौचक्का रह गया। अब उसे इस पूरे मामले पर सफाई देने नहीं बन रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में साफ किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सफल वार्ता तभी संभव है, जब पाकिस्तान अपने आतंकवादियों के खिलाफ निरंतर और सख्त कदम उठाए। उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच में असली जड़ पाकिस्तान की ज़मीन पर पनप रहा आतंकवाद है। साथ ही अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के लिए चर्चा का मुद्दा है, लेकिन ट्रम्प प्रशासन इसमें दोनों देशों की मदद के लिए तैयार है। लेकिन पाकिस्तान को भारत से बातचीत बढ़ाने के लिए आतंक को खत्म करना होगा। इसके लिए उसे कुछ स्थिर कदम उठाने की जरूरत है।अमेरिकी विदेश विभाग के कहा कि हमारी दशकों से यही नीति रही है कि कश्मीर भारत-पाक के बीच का मुद्दा है और इन दोनों देशों को ही बातचीत की दिशा तय करनी है।

वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद ब्रैड शेरमैन ने कहा, 'सभी जानते हैं भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसी बात कभी नहीं करेंगे। हर कोई जो दक्षिण एशिया की विदेश नीति के बारे में कुछ भी जानता है, वो ये जानता है कि कश्मीर मसले में भारत लगातार तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का विरोध करता रहा है। सभी जानते हैं कि पीएम मोदी कभी ऐसी बात नहीं करेंगे। ट्रंप का बयान गैर संजीदा और भ्रामक है और शर्मिंदा करने वाला भी। मैंने भारतीय राजदूत हर्ष श्रृंगला से ट्रंप की इस गैरसंजीदा और शर्मसार करने वाली गलती के लिए माफी मांगी है। मैंने डोनाल्ड ट्रंप की शौकिया और शर्मनाक गलती के लिए भारतीय राजदूत हर्ष वी श्रृंगला से माफी मांगी है।'

इन सबके बीच इस मसले पर सरकार की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर सामने आए। उन्होंने कहा कि PM ने ट्रंप से ऐसी कोई चर्चा नहीं की। राज्यसभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर जो दावा किया है वह बिल्कुल गलत है, पीएम मोदी ने इस तरह की कोई मांग नहीं की है। उन्होंने कहा कि मैं सदन को विश्वास दिलाता हूं कि ये दावा पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से सिर्फ द्विपक्षीय बातचीत होगी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत का स्टैंड हमेशा से यह रहा है कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दों पर केवल द्विपक्षीय रूप से चर्चा की जाती है। पाकिस्तान के साथ किसी भी मसले पर आगे बढ़ने के लिए सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को समाप्त करने की आवश्यकता होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि शिमला समझौता और लाहौर की घोषणा भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दों को हल करने के लिए द्विपक्षीय आधार प्रदान करते हैं।

इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने दो ट्वीट करते हुए इस पर भारत का रुख साफ किया। उन्होंने कहा, 'हमने अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा प्रेस को दिए उस बयान का देखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि भारत और पाकिस्तान अनुरोध करते हैं तो वह कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से इस तरह का कोई अनुरोध नहीं किया है।'

आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप अपने बड़बोलेपन के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं। कई मौके पर देखा गया है ट्रंप ने बिना सोचे समझे कोई बयान या फिर आदेश दे देते हैं। और अपनी भूल का एहसास होने पर उन्हें अपना बयान या फिर फैसला वापस लेना पड़ता है। इस आदत की वजह से दुनिया ही नहीं अमेरिका में भी उनकी विश्वसनीयता लगातार घटती जा रही है।

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