पाक के 'कश्मीरी' घाव पर चीन ने रगड़ा नमक, भारत को दी निर्यात सुविधा और रखे निवेश के नये प्रस्ताव

राजीव शर्मा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (12 अगस्त): कश्मीर मुद्दे पर पिछले एक हफ्ते से जल-भुन रहे पाकिस्तान के घावों पर चीन ने मलहम की जगह नमक रगड़ दिया है। इसके बाद पाकिस्तान के विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री इमरान खान को खरी-खरी सुनानी शुरू कर दी है। 

कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने, कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने और उसे दो हिस्सों में बांटने से बौखलाय पाकिस्तान को जब दुनिया के किसी देश ने भाव नहीं दिया तो उसने अपने विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को बीजिंग भेजा और चीन से गुहार लगाई कि भारत के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई करे। जब चीन ने ऐसा करने से इंकार कर दिया तो पाकिस्तान ने दवाब बनाया कि कार्रवाई न हो तो कम से कम कोई सख्त बयान ही जारी कर दिया जाये। चीन ने ऐसा भी करने से साफ मना कर दिया। 

बीजिंग से अपमानित होकर वापस लौटे शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि चीन ने भरोसा दिया ह यूएनएससी में भारत के खिलाफ पाकिस्तान के प्रस्ताव पर समर्थन देगा। चीन के इसी लॉलीपॉप के सहारे इमरान खान और उनकी कैबिनेट अपनी पीठ थपथपा रही थी।

इसी बीच भारत के विदेशमंत्री एस. जयशंकर चीन पहुंचे तो चीन के विदेशमंत्री वांग ई ने उनका गर्मजोशी से उनका स्वागत किया और पाकिस्तान को चिढ़ाते हुए ऐलान किया कि चीन भारत को निर्यात सुविधाएं देगा। वांग यी यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहाकि चीन भारत के साथ सीमा व्यापार, परस्पर निवेश, इंडस्ट्रीयल प्रोडक्शन और टूरिज्म में सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है। इसके अलावा चीन कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए वीजा बढ़ाने के अलावा यात्री सुविधाओं में इजाफे का ऐलान किया है।

बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के इन ऐलानों से पूरे पाकिस्तान में मातम सा छा गया है। क्यों कि प्रधानमंत्री इमरान खान समेत पूरी सरकार और वहां के सियासी नेताओं को यह उम्मीद थी कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मौजूदगी में चीन भारत कोई सख्त संदेश देगा। मगर, उनकी इच्छा के उलट चीन ने भारत के साथ व्यापार सहयोग बढ़ाने और सहूलियतों के अंबार लगा दिये। 

कश्मीर के संदर्भ में चीनी विदेश मंत्री वांग ई ने सिर्फ इतना ही कहा कि भारत और पाक के बीच जारी तनाव पर उसकी पैनी नजर है। चीन ने भारत से इस मसले पर सकारात्मक प्रयास करने की उम्मीद रखता है। भारत और पाकिस्तान के बीच कोई भी द्विपक्षीय मतभेद विवाद का कारण नहीं बनना चाहिए।

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