घाटी की हालात पर चर्चा के लिए विपक्षी दलों का 'कश्मीर सम्मेलन'

नई दिल्ली (11 मई): आतंकी बुहरान वानी की मौत के बाद पाकिस्तान के इशारे पर चंद लोग धाटी में अमन चैन के लिए खतरा बने हुए हैं और लगातार युवाओं को भड़का रहे हैं। लिहाजा घाटी में लगातार तनाव बना हुआ है। इसी कड़ी में घाटी में हालात को सुधारने के लिए विपक्षी पार्टियों ने भी अपनी तरफ से कवायद तेज कर दी है।


दिल्ली में कश्मीर सम्मेलन को लेकर सभी विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिशें जारी हैं। इस मामले पर बीते तीन दिनों में जदयू नेता शरद यादव, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से तीन बार मुलाकात कर चुके हैं। इसके अलावा भाजपा नेता यशवंत सिन्हा की भी शरद यादव से मुलाकात हुई है।


उधर, इस बारे में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला ने कहा है कि विपक्षी दल कश्मीर सम्मेलन के जरिए कश्मीर संकट का राजनीतिक समाधान निकालने की कोशिश करने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर किसी एक दल से जुड़ा मसला नहीं है, अगर इस सम्मेलन में कोई संभावित समाधान सामने आता है तो यह अच्छी बात होगी।


वहीं बीजेपी ने विपक्षी दलों के प्रस्तावित कश्मीर सम्मेलन पर सवाल उठाया है। बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने पूछा है कि अलगाववादियों से बात करने के बाद विपक्षी दल क्या करेंगे, क्योंकि ऐसी कोई बात नहीं मानी जा सकती जो संविधान के दायरे से बाहर हो। उन्होंने यह भी कहा कि मुझे ताज्जुब होगा अगर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस कथित कश्मीर सम्मेलन में शामिल होते हैं, क्योंकि मैं अन्य नेताओं की मजबूरियां समझ सकता हूं।