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करवाचौथ का व्रत आज, जानें- शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

सुहाग का पावन पर्व करवा चौथ भारत समेत दुनियाभर में आज मनाया जाएगा। आज के दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु की कामना करते हुए व्रत रखंती है। वहीं शाम को करवा से चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती है। इस पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखा जा है।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (17 अक्टूबर): सुहाग का पावन पर्व करवा चौथ भारत समेत दुनियाभर में आज मनाया जाएगा। आज के दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु की कामना करते हुए व्रत रखंती है। वहीं शाम को करवा से चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती है। इस पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखा जा है। करवा चौथ को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी भी कहा जाता है। करवाचौथ का पर्व पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक है। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। कार्तिक मास की चतुर्थी जिस रात रहती है उसी दिन करवा चौथ का व्रत किया जाता है।  महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सर्गी खाती हैं। यह खाना आमतौर पर उनकी सास बनाती हैं। इसे खाने के बाद महिलाएं पूरे दिन भूखी-प्यासी रहती हैं। दिन में शिव,पार्वती और कार्तिक की पूजा की जाती है। शाम को देवी की पूजा होती है, जिसमें पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है। चंद्रमा दिखने पर महिलाएं छलनी से पति और चंद्रमा की छवि देखती हैं। पति इसके बाद पत्नी को पानी पिलाकर व्रत तुड़वाता है।

पूजा मुहूर्त...

पूजा मुहूर्त: शाम 5.50 से 07.05 बजे तक 

करवा चौथ व्रत समय- सुबह 06.23 बजे से रात 08.16 तक व्रत की 

चंद्रोदय का समय- रात 8.16 बजे 

ऐसे करें करवाचौथ का व्रत...

व्रती महिलाए सुबह नित्यकर्मों से निवृत्त होकर, स्नान और संध्या की आरती करके, आचमन के बाद संकल्प लेकर यह कहें कि मैं अपने सौभाग्य एंव पुत्र-पौत्रादि तथा अखंड सौभाग्य की ,अक्षय संपत्ति की प्राप्ति के लिए करवा चौथ का व्रत करूंगी। यह व्रत निराहार ही नहीं अपितु निर्जला के रूप में करना अधिक फलप्रद माना जाता है। इस व्रत में शिव-पार्वती, कार्तिकेय और गौरा का पूजन करने का विधान है।

ऐसे करें करवाचौथ का पूजा...

चंद्रमा, शिव, पार्वती, स्वामी कार्तिकेय और गौरा की मूर्तियों की पूजा षोडशोपचार विधि से विधिवत करके एक तांबे या मिट्टी के पात्र में चावल, उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री, जैसे- सिंदूर, चूडियां, शीशा, कंघी, रिबन और रुपया रखकर उम्र में किसी बड़ी सुहागिन महिला या अपनी सास के पांव छूकर उन्हें भेंट करनी चाहिए। सायं बेला पर पुरोहित से कथा सुनें, दान-दक्षिणा दें। तत्पश्चात रात्रि में जब पूर्ण चंद्रोदय हो जाए तब चंद्रमा को छलनी से देखकर अर्घ्य दें। आरती उतारें और अपने पति का दर्शन करते हुए पूजा करें। इससे पति की उम्र लंबी होती है।उसके बाद पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलें।

(Image credit: Google )

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