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करवा चौथ: इस वजह से महिलाएं छलनी से देखती हैं चांद और पति का चेहरा

सुहागिन महिलाओं के सभी व्रतों में करवा चौथ बेहद खास है। इस दिन महिलाएं दिन भर भूखी-प्‍यासी रहकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। यही नहीं कुंवारी लड़कियां भी मनवांछित वर के लिए या होने वाले पति की खातिर निर्जला व्रत रखती हैं।

                                                                                                                  Image credit: Google               

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (27 अक्टूबर): सुहागिन महिलाओं के सभी व्रतों में करवा चौथ बेहद खास है। इस दिन महिलाएं दिन भर भूखी-प्‍यासी रहकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। यही नहीं कुंवारी लड़कियां भी मनवांछित वर के लिए या होने वाले पति की खातिर निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन पूरे विधि-विधान से माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने के बाद करवा चौथ की कथा सुनी जाती है। फिर रात के समय चंद्रमा को अर्घ्‍य देने के बाद ही यह व्रत संपन्‍न होता है। मान्‍यता है कि करवा चौथ का व्रत करने से अखंड सौभाग्‍य का वरदान मिलता है।

करवा चौथ का त्‍योहार दीपावली से नौ दिन पहले मनाया जाता है। हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास की चतुर्थी को आता है। वहीं, अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से यह त्‍योहार अक्‍टूबर के महीने में आता है। 

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करवा चौथ की तिथि और शुभ मुहूर्त (Karva Chauth Date and Time)चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 27 अक्‍टूबर की शाम 06 बजकर 37 मिनटचतुर्थी तिथ‍ि समाप्‍त: 28 अक्‍टूबर की शाम 04 बजकर 54 मिनटपूजा का शुभ मुहूर्त: 27 अक्‍टूबर की शाम 05 बजकर 48 मिनट से शाम 07 बजकर 04 मिनट तक.कुल अवधि: 1 घंटे 16 मिनट.

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करवा चौथ के दिन महिलाएं चांद और पति को इसीलिए छलनी से देखती हैं...

हिंदू मान्यताओं के मुताबिक चंद्रमा को भगवान ब्रह्मा का रूप माना जाता है और चांद को लंबी आयु का वरदान मिला हुआ है। चांद में सुंदरता, शीतलता, प्रेम, प्रसिद्धि और लंबी आयु जैसे गुण पाए जाते हैं। इसीलिए सभी महिलाएं चांद को देखकर ये कामना करती हैं कि ये सभी गुण उनके पति में आ जाएं।

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