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कांग्रेस के हाथ से कर्नाटक फिसलने की ये हैं बड़ी वजहें

कर्नाटक में बीजेपी की पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनना तय है। बीजेपी 222 सीटों में से करीब 109 सीटों पर चल रही है। बहुमत का आंकड़ा 112 है ऐसे में बीजेपी को शायद जेडीएस के साथ की भी जरुरत नहीं होगी। बीजेपी की इस शानदार जीत के बाद दिल्ली से लेकर कर्नाटक की राजधानी बैंगलूरु तक जश्न का माहौल है। कार्यकर्ता ढोल नगाड़ों पर नाच रहे हैं और पटाखे फोड़ रहे हैं।

नई दिल्ली (15 मई): कर्नाटक में बीजेपी की पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनना तय है। बीजेपी 222 सीटों में से करीब 109 सीटों पर चल रही है। बहुमत का आंकड़ा 112 है ऐसे में बीजेपी को शायद जेडीएस के साथ की भी जरुरत नहीं होगी। बीजेपी की इस शानदार जीत के बाद दिल्ली से लेकर कर्नाटक की राजधानी बैंगलूरु तक जश्न का माहौल है। कार्यकर्ता ढोल नगाड़ों पर नाच रहे हैं और पटाखे फोड़ रहे हैं।

बीजेपी अकेले बहुमत की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है और कांग्रेस का आखिरी महत्वपूर्ण किला कर्नाटक भी उसके हाथ से फिसलता दिखाई दे रहा है।  दक्षिण भारत में इसे बीजेपी के आगे बढ़ने की शुरुआत कहा जा रहा है तो कांग्रेस के लिए आने वाले दिनों में चुनौती और बड़ी होने जा रही है। आइए जानते हैं कि कांग्रेस की इस हार की क्या बड़ी वजहें रहीं...

-राज्य में एंटी इन्कमबेसी फैक्टर का सामना करना पड़ा। सीएम सिद्धारमैया के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार इंदिरा कैंटीन जैसी योजनाओं के बावजूद लोगों को लुभाने में नाकाम रही। 

-कांग्रेस ने चुनावों से ठीक पहले लिंगायत वोटरों को लुभाने के लिए इसे अलग धर्म की मान्यता देने का कार्ड चला था। बीजेपी ने इसे समाज तोड़ने वाला कदम बताया था। राज्य की करीब 76 सीटों पर दखल रखने वाले लिंगायत समुदाय को लुभाने की यह कोशिश कांग्रेस को भारी पड़ी।

-कांग्रेस और बीजेपी दोनों के मेनिफेस्टो में महिलाओं को आरक्षण, युवाओं को शिक्षा और रोजगार के भरोसे जैसे तमाम वादे लगभग एक जैसे ही थे। हालांकि, बीजेपी ने कांग्रेस के शासनकाल में भ्रष्टाचार और केंद्र की योजनाओं और फंड को लागू न करने जैसे मामलों पर राज्य की सरकार को घेरने का काम किया और इसमें सफल भी हुई।

- पीएम मोदी ने इन चुनावों में बीजेपी की ओर से प्रचार की कमान संभाली. इस दौरान पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उनका कदम-दर-कदम साथ दिया।

-मोदी अपने प्रचार में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर सीएम सिद्धारमैया से जुबानी जंग में अकेले लोहा लेते दिखाई पड़े।

-पारंपरिक रूप से दलित वोटर्स को कांग्रेस के साथ माना जाता है. इन चुनावों में बहुजन समाज पार्टी का जेडीएस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना भी कांग्रेस के लिए नुकसानदायक रहा। इसके अलावा कांग्रेस को सेक्युलर वोट के बंटवारे का भी नुकसान उठाना पड़ा।

-बहुजन समाज पार्टी और एनसीपी 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए गैर बीजेपी, गैर कांग्रेसी थर्ड फ्रंट बनाने के लिए कांग्रेस से छिटक रही हैं, यही चीज कांग्रेस को भारी पड़ा।

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