जैश सरगना मसूद अजहर का करीबी था कामरान गाजी, स्थानीय लड़कों को देता था ट्रेनिंग



न्यूज24 ब्यूरो, नई दिल्ली (18 फरवरी): आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की ओर से किए गए पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड कामरान उर्फ ग़ाज़ी को भारतीय सेना ने पुलवामा में हुई एक मुठभेड़ में मार गिराया है। ग़ाजी जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर है। इस की ट्रेनिंग के बाद सीआरपीएफ वाहन पर आत्मघाती हमला किया गया था, जिसमें 40 जवान शहीद हुए थे। 






पुलवामा और आसपास हुई कई छोटी-बड़ी आतंकी वारदातों में कामरान का हाथ था। कामरान की उम्र 28 साल बताई जाती है।  सूत्रों के मुताबिक, कामरान उर्फ गाज़ी को पाकिस्तान की आईएसआई ने ट्रेनिंग दी है। उसे इस तरह से दक्ष किया गया है कि वो फिदायीन हमलों को अंजाम दे पाए। वो करीब दो महीने पहले पुंछ के रास्ते भारत में घुसा था. उसके बाद वो पुलवामा पहुंचा। 







यहां पर उसने स्थानीय लड़कों को ट्रेनिंग देने का काम शुरू किया। बताते हैं कि जब वो पाकिस्तान से कश्मीर में घुसा तो उसके पास काफी बड़ी संख्या में हथियार और विस्फोटक भी थे। वैसे एक अन्य आतंकी ग़ाज़ी रशीद को पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले का मास्टरमाइंड बताया जाता है। 28 वर्षीय इस आतंकी को आईएसआई के जरिए ही पाकिस्तान सेना के विशेष सेवा समूह द्वारा ट्रेनिंग दिलाई गई। सूत्रों के अनुसार वह पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम सीमांत इलाकों में लड़ाई लड़ चुका है। राशिद शायद पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाके का रहने वाला है। 







अफगान में मुजाहिद्दीन रहा गाजी राशिद आईईडी एक्सपर्ट बताया जाता है। माना जा रहा है कि गाजी ने अपने दो साथियों के साथ दिसंबर में भारत में घुसपैठ की थी और दक्षिण कश्मीर में छिप गया। इंटेलिजेंस एजेंसियों के मुताबिक, जैश ने पाकिस्तानी कमांडर राशिद को कश्मीर में हमला करने को कहा था। हालांकि, जैश ये भी चाहता था कि इस हमले में स्थानीय युवकों का इस्तेमाल किया जाए। 







कामरान भी उसी अवधि में भारत में घुसा और कश्मीर में पुलवामा को उसने अपना बेस बनाया। वो जैश ए मोहम्मद का सीनियर कमांडर था. बताया जाता है कि उसने गाजी से अलग भारत में घुसपैठ की थी। वो भी अपने साथ विस्फोटक और हथियार लेकर आया था, ताकि उनका उपयोग आतंकी गतिविधियों में किया जा सके। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, कामरान पुंछ के रास्ते कश्मीर में दाखिल हुआ. वो भी पुलवामा पहुंचा. अपने साथ वो आईएसआई द्वारा तय प्लान भी लेकर आया था। उसे स्थानीय तौर पर कुछ लोगों ने मदद की। उन्हीं की मदद से उनसे यहां जंगलों में अपना कैंप लगाया। 





कामरान ने आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए युवाओं को भर्ती किया। बताते हैं कि वो अपने साथ कई लोगों को भी लेकर आया था। जो सभी अलग होकर पुलवामा पहुंचे। पिछले दो महीने से वो सभी यहीं थे. यहीं रहकर वो अपने द्वारा लाए गए हथियारों और विस्फोटकों से कश्मीर के युवाओं को ट्रेनिंग करने के साथ उनका ब्रेन वॉश कर रहे थे। खुफिया सूत्र ये भी बताते हैं कि कामरान और गाजी लगातार जैश ए मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के साथ संपर्क में रहते थे।