कोई चीनी दीवार नहीं, उत्तराखंड से परंपरागत रास्ते से जारी है मानसरोवर यात्रा


नई दिल्ली(29 जून): कैलाश मानसरोवर यात्रा के परंपरागत रास्ते पर चीन ने कोई रोक नहीं लगाई है। यह रास्ता अब भी खुला हुआ है और इससे होकर यात्री बिना किसी रोकटोक के जा रहे हैं।


-  इस रास्ते से होकर अब तक करीब 150 यात्री कैलाश मानसरोवर जा चुके हैं और इसी रास्ते से करीब 850 यात्री और जाएंगे।


- चीन ने नाथूला-पास से होकर कैलाश मानसरोवर जाने वाले रास्ते पर रोक लगाई है। इस रास्ते से करीब 350 यात्रियों को जाना था, लेकिन अब यहां सीमा पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनाव हो गया है। चीन ने तो साफ कह दिया है कि जब तक भारतीय सेना वहां से पीछे नहीं हटती है तब तक यात्रा को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा। इस मसले पर न तो सेना और न ही सरकार ने अपना रुख साफ किया है। बस इतना कहा कि यात्रा में कुछ परेशानी आ रही है जिसे जल्द सुलझा लिया जाएगा।


- यात्रियों के दो जत्थे वापस आ चुके हैं। इस रास्ते से यात्रियों के सात जत्थों को जाना था।इस रास्ते की सबसे बड़ी खासियत है कि इससे होकर जाने वाले यात्रियों को पैदल न के बराबर चलना होता है। इस रास्ते से सड़क मार्ग के जरिए सीधे कैलाश मानसरोवर तक पहुंचा जा सकता है।


- वहीं कैलााश मानसरोवर जाने का परंपरागत रास्ता उत्तराखंड के लिपुलेख से होकर जाता है।  इस रास्ते से यात्रियों को करीब दो सौ किलोमीटर पैदल चलना होता है। अब तक इस रास्ते से होकर तीन जत्थे जा चुके हैं। एक जत्थे में करीब 50 यात्री होते हैं। अभी 14 और जत्थे इस रास्ते से कैलाश मानसरोवर जाएंगे। हलांकि यह रास्ता भी चीन के साथ 1962 में हुई लड़ाई के दौरान बंद हो गया था लेकिन फिर 1981 से शुरू हो गया।