जब हाईकोर्ट के जज ने सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ जारी किया आदेश

प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली ( 31 मार्च ): भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में शुक्रवार को एक और अध्याय जुड़ गया। जब कलकत्ता हाईकोर्ट के जज एक आरोपी के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए।


सात जजों की संविधान पीठ के सामने जस्टिस सीएस कर्नन अवमानना के मामले में जब पेश हुए, अदालत खचाखच भरी हुई थी। कोर्ट में मौजूद हर व्यक्ति चाहे वो एडवोकेट हो, सीनियर एडवोकेट हों, कोर्ट के नन ज्यूडिशियल स्टाफ हों या पत्रकार,  सब लोग उस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनना चाहते थे।


सीजेआई की अगुवाई वाली संविधानपीठ ने जस्टिस कर्नन से सवाल किया कि क्या वो जजों पर लगाये गए आरोपों पर कायम हैं, या जजों के खिलाफ लगाये आरोप वापस लेंगें और बिना शर्त माफ़ी मांगने को तैयार हैं।


जस्टिस कर्नन ने इस सवाल का जवाब तो नहीं दिया, लेकिन संविधान बेंच से कहा कि 'मेरे से ज्यूडिशियल काम वापस लेने से मैं मानसिक रूप से परेशान हो चल रहा हूं, मुझे गिरफ्तार करो या दण्डित करो, लेकिन मुझे मेरा काम लौटा दो! 'जस्टिस कर्नन ने कहा 'मैंने न्यायपालिका के खिलाफ कुछ नहीं किया। मैं भ्रष्ट जजों के खिलाफ लड़ रहा हूं, जिनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया। आप चाहे तो मेरे खिलाफ जांच करवा सकते हैं, मैं गलत हूं तो जो चाहे सजा दें।' जस्टिस कर्नन ने अपने खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने पर ऐतराज जताते हुए दलील दी कि 'कोर्ट ने बिना उनका पक्ष सुने ही अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी, वारंट जारी कर दिया गया जो ठीक नहीं है।


कोर्ट ने एक बार फिर अपना सवाल दोहराया कि वो जजों पर लगाये गए आरोपों पर कायम हैं या जजों के खिलाफ लगाये आरोप वापस लेंगे और बिना शर्त माफ़ी मांगेगें! लेकिन इस बार भी कर्नन ने जवाब नहीं दिया। कोर्ट ने जस्टिस कर्नन को सलाह दी कि वो चाहें तो अपनी मानसिक स्थिति के बारे में मेडिकल सर्टिफिकेट दे सकते हैं। 'जस्टिस कर्नन ने जवाब दिया 'इसकी कोई ज़रूरत नहीं।'


इसके बाद कोर्ट ने जस्टिस कर्नन को एक और मौका देते हुए जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया। कोर्ट ने जस्टिस कर्नन को फ़िलहाल जज के तौर पर काम दिए जाने की अपील को ठुकरा दिया।


कोर्ट में एक खास बात ये भी हुई कि जब कोर्ट ने उनको जज के के रूप में काम करने की अपील ठुकरा दी तो कर्नन ने कहा, 'या तो मुझे मेरा काम लौटाया जाए, नहीं तो मैं अगली सुनवाई में नहीं आऊंगा। कोर्ट मेरे खिलाफ जो चाहे कार्रवाई कर सकता है!'


लेकिन जस्टिस कर्नन जब कोर्ट से बाहर आये तो जो हुआ शायद ही किसी ने सोचा होगा। कर्नन ने मीडिया के सामने संविधान पीठ के सातों जजों के खिलाफ एक आदेश पारित किया कि 3 अप्रैल से इन जजों को न कोई न्यायिक काम मिलेगा और न ही प्रशासनिक।


जस्टिस कर्नन ने हायर ज्यूडिशियरी के कई वर्तमान और पूर्व जजों के खिलाफ भ्रष्टचार का आरोप लगाया है। सुप्रीम कोर्ट इसी मामले में सुनवाई कर रहा है।