काला कोट पहनकर हर कोई वकील नहीं बन सकता: सुप्रीम कोर्ट

प्रभाकर मिश्र, नई दिल्ली (2 मार्च):  सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वकीलों को फटकार लगाते हुए कहा कि केवल काला कोट पहन लेने से हर कोई वकील नहीं बन सकता। कोर्ट ने वकालत के 'भीड़युक्त' पेशे में केवल मेरिट वाले योग्य लोगों को ही प्रवेश देने के मामले में सुनवाई के दौरान ऐसा कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पटियाला हाउस कोर्ट में हुई घटना पर गौर करने के बाद ऐसा कहा है। गौरतलब है, 'देशद्रोह' मामले में सुनवाई के दौरान जवाहरलाल यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के नेता कन्हैया कुमार से कथित तौर पर वकीलों के एक समूह ने मारपीट की थी।

बुधवार को मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, "किसी को भी काला कोट पहनने के बाद दूसरे काम की मंजूरी नहीं होगी।" बेंच बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) की तरफ से कराए जाने वाले ऑल इंडिया बार एक्ज़ामिनेशन (एआईबीई) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है। इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने वाले लोगों को वकालत का अभ्यास करने की योग्यता हासिल होती है।

सुप्रीम कोर्ट बेंच ने यह मामला तीन जजों की बेंच को भेजा है। साथ ही मामले में सहयोग करने के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त करने के लिए भी आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा, "आपके (वकीलों) के लिए यह समय है कि आप अपने पेशे में सुधार करें। हमें एक मजबूत व्यवस्था की जरूरत है। जहां काला कोट पहनकर हर कोई वकील नहीं बन सकता।" साथ ही कोर्ट ने कहा, "बहुत सारे वकीलों ने पेशे में भीड़भाड़ कर दी है। व्यवस्था सुधार चाहती है।"

मुख्य न्यायाधीश ने वर्तमान व्यवस्था में ख़ामियां भी पाई हैं। जैसे वकीलों को सीधे सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने की अनुमति होना। कोर्ट ने कहा कि एक वकील के लिए यह आवश्यक है कि वह सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने से पहले एक ट्रायल कोर्ट से शुरुआत करे। कोर्ट ने कहा, "केवल इसलिए कि आपके पास एक डिग्री है, इसका मतलब यह नहीं कि आप वकील बन गए। अगर आप आधे डॉक्टर नहीं बन सकते तो आप आधे वकील भी नहीं बन सकते। न्यायपालिका उसी तरह महत्वपूर्ण है, जिस तरह एक मरीज का इलाज करना।"

बेंच ने लॉ ग्रैजुएट्स के लिए स्टेट बार काउंसिल से लाइसेंस पाने के लिए एक परीक्षा देने के पक्ष में तर्क भी रखा। वर्तमान में लोगों को एआईबीई में बैठने से पहले ही लाइसेंस मिल जाता है। एआईबीई को 2010 में शुरू किया गया था। बीसीआई का कहना है कि इस परीक्षा में आधारभूत स्तर के कौशल का आकलन किया जाता है। इसे वकालत के पेशे में प्रवेश करने के लिए न्यूनतम बेंचमार्क बनाया गया है।