देश के बड़े जलाशयों में 'गायब' होने के कगार पर पहुंचा पानी का लेवल

नई दिल्ली (18 जून): धीमे पड़े मानसून के कारण देश के 91 बड़े जलाशयों में पानी गायब होने के कागार पर है। इनमें केवल 15 फीसदी पानी ही बचा है। इसका असर केवल खरीफ के फसल की बोवाई पर ही नहीं बल्कि पीने के पानी की पूर्ति पर भी दिखाई दे रहा है। 

आने वाले हफ्तों में बारिश होती है तो खरीफ की फसलें के बोवाई क्षेत्र में बढ़ोतरी होगी। मौजूदा समय में पानी की कमी के कारण गन्ने को छोड़कर चावल, दाल, तिलहन और अन्य फसलों के क्षेत्र सिकुड़ गए हैं। खरीफ की फसलों की बोवाई पिछले साल से 10 फीसदी कम हुई है।

देश के बड़े और मुख्य जलाशयों में पानी का स्तर जो 26 मई को 28.81 बिलियन क्यूबिक मीटर्स (BCM) था, गिरकर 16 जून को 23.78 बिलियन क्यूबिक मीटर्स रह गया है। इस प्रकार अहम जलाशयों में पानी का स्तर पहले ही चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे में अगर अगले चार-पांच दिनों में मानसून ने रफ्तार नहीं पकड़ी तो समस्या गंभीर हो सकती है।

दक्षिण भारत के जलाशयों की हालत सबसे खस्ता है। सेंट्रल वाटर कमीशन (CWC) के आंकड़ों के मुताबिक दक्षिण के 31 जलाशयों में 4.86 BCM ही बचा है जो अपनी क्षमता के मुकाबले महज 9 फीसदी है। वहीं दक्षिण के मुकाबले उत्तर भारत की स्थिती बेहतर है, जहां के छह बड़े जलाशयों में 23 फीसदी पानी बचा है। CWC के आंकड़ों के मुताबिक 91 बड़े जलाशयों में 27 पश्चिम भारत में, 15 पूरब में और 12 केंद्र में हैं। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय हाईड्रोपावर सुविधा से लैस हैं जिनकी स्थापित क्षमता 60 मेगावाट से ज्यादा है।