जेएनयू में फूंका गया मोदी-शाह का पुतला

नई दिल्ली (13 अक्टूबर) : देशभर में जहां दशहरा पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, आतंकी मास्टरमाइंड हाफिज सईद और कई अन्य आतंकी संगठनों के मुखिया, रावण के पुतलों का चेहरा रहे और उनका दहन भी किया गया वहीं जेएनयू के छात्रों के एक वर्ग ने रावण के पुतले के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा प्रमुख अमित शाह के पुतले भी जलाये।

कांग्रेस से जुड़ी नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन आफ इंडिया (एनएसयूआई) के सदस्यों ने रावण के तौर पर मोदी का पुतला जलाकर दशहरा मनाया। एनएसयूआई ने दावा किया कि यह केंद्र द्वारा अपने वादों को पूरा करने में विफलता और देशभर में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों पर सतत हमले के खिलाफ उसका विरोध था।

इन पुतलों में मोदी और शाह के चेहरों के अलावा योग गुरु बाबा रामदेव, साध्वी प्राची, योगी आदित्य नाथ, नाथूराम गोडसे, आसाराम बापू और जेएनयू के कुलपति जगदीश कुमार के चेहरे थे। छात्रों ने हाथों में तख्तियां भी ले रखी थी जिन पर नारा लिखा था,‘बुराई पर सच्चाई की विजय’। इस दौरान मोदी और बाकी चेहरों के खिलाफ नारेबाजी भी हुई।

असंतोष का प्रतीक है दहन एनएसयूआई के कार्यकर्ता ने कहा कि यह पुतला दहन मौजूदा सरकार के साथ हमारे असंतोष का प्रतीक था। इसके पीछे का विचार राजकाज से बुराइयों को उखाड़ फेंकना और विद्यार्थियों व लोगों के अनुकूल व्यवस्था लाना है। यह पुतला दहन जेएनयू परिसर में प्रसिद्ध सरस्वती ढाबा में किया गया।

ABVP ने किया विरोध, SFI ने सपोर्ट बीजेपी की स्टूडेंट विंग के मेंबर सौरभ शर्मा ने कहा कि एनएययूआई ओछी हरकतों पर उतर आई है। वो बजूद बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें 1984 दंगों के आरोपियों का पुतला फूंकना चाहिए था।'

एसएफआई के प्रेसिडेंट वलीउल्ला खां कादरी ने कहा कि 'हम पुतला फूंकने का सपोर्ट करते हैं। लोकतंत्र में सबको विरोध दर्ज कराने हक है। पीएम वादों को पूरा नहीं कर पाए। लोग उनसे नाराज हैं।''