JNU केस: कन्हैया को बेल या जेल, आज आ सकता है फैसला

नई दिल्ली(2 मार्च): JNU कैंपस में देशद्रोह के आरोप में जेल बंद कन्हैया की जमानत पर आज फैसला आ सकता है। सोमवार को इस मामले पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए अपना फैसला आज तक के लिए सुरक्षित कर लिया था। इधर फॉरेंसिक रिपोर्ट में कन्हैया कुमार से जुड़े वीडियो से छेड़छाड़ की बात सामने आ रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सात में दो वीडियो फर्जी हैं। बाकी वीडियो में भी छेड़छाड़ की गई है।

आपको दिल्ली के पूर्व कमिश्नर बस्सी का ये बयान याद होगा। ताल ठोक कर दावा कर रहे हैं कि कन्हैया के खिलाफ देशद्रोही होने का पूख्ता सबूत है। आपतो बता दें कि जो पुलिस कन्हैया के देशद्रोही का दावा कर रही थी वही पुलिस अदालत के सामने सोमवार को अपने दावे से पलट गई।

 

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि उसके पास ऐसा कोई वीडियो नहीं है जिसमें कन्हैया को देशविरोधी नारा लगाते हुए देखा जा सके। अब सवाल ये उठता है कि तत्कालीन पुलिस कमिश्नर का कन्हैया को देशद्रोही बताने वाला दावा कहां गया, पूरे देश में माहैौल बिगाड़ने वाला वीडियो कहां गया। क्यों दिल्ली पुलिस अदालत में सबूत नहीं दे पाई  और दिल्ली असली गुनगहारों को पकड़ने के बजाय जेएनयू के छात्रों को देशद्रोही बताने पर क्यों तुली थी।

 

इन देशविरोधी नारों वाले वीडियो का सच सामने आ गया है। जेएनयू में नौ फरवरी को देशद्रोही नारेबाजी के आरोपी कन्हैया कुमार से जुड़े वीडियो से छेड़छाड़ की गई थी। फॉरेंसिक लैब में जांच के बाद पेश किए गए सात वीडियो में से दो को फर्जी पाया गया है। ट्रूथ लैब की फाइनल सप्लीमेंट्री रिपोर्ट में बताया गया है कि सात में दो वीडियो पूरी तरह फर्जी हैं। बाकी वीडियो में भी छेड़छाड़ की गई है।

शायद इसी झूठ के पुलिंदे पर तैयार किए गए सबूत की डर से दिल्ली पुलिस अदालत में पलट रही है , और स्पेशल सेल को बलि का बकरा बना रही है। पुलिस के बेतुके दलीलों पर ही देशद्रोह की धारा 124 (A) में गिरफ्तार जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से सोमवार को पूछा था । 

आपको पता भी है कि देशद्रोह होता क्या है? उम्रकैद का मामला बनता है या फिर सिर्फ जुर्माने का। मामला स्पेशल सेल के पास चला गया है और अब सारी जिम्मेदारी उसी की है। देशद्रोह के आरोप में तिहाड़ जेल में बंद कन्हैया की जमानत पर आज फैसला आना है। देश की निगाहें फैसले पर टिकी है , साथ ही देशप्रेम और देशद्रोह पर सियासत भी गर्म है।