कभी ठेका मजदूर थे मधु कोड़ा, ऐसे बनाया करोड़ों की संपत्ति

रांची (14 दिसंबर): दिल्ली की स्पेशल CBI कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को कोयला घोटाले में साल की सजा सुनाई है। मधु कोड़ा पर आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी और अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप है। मधु कोड़ा का जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा और रोचक रहा है। 

मधु कोड़ा का जन्म झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के पाताहातू में एक मजदूर परिवार में हुआ था। उनका आरंभिक जीवन गरीबी में गुजरा। वे ठेका मजदूर रह चुके हैं। उन्होंने राजनीति की शुरुआत ठेका मजदूरों की यूनियन से की। बिहार से अलग झारखंड गठन के बाद हुए पहले चुनाव में कोड़ा ने सफलता का स्वाद चखा। कोड़ा ने बीजेपी के टिकट पर जगन्नाथपुर से चुनाव लड़ा और जीत के बाद पंचायती राज मंत्री बने। 2003 में अर्जुन मुंडा की सरकार बनने के बाद भी पंचायती राज मंत्री पद पर काबिज रहे। 2005 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बीजेपी का टिकट नहीं मिला तो उन्होंने निर्दलीय दावेदारी की। इस चुनाव में भी उन्हें सफलता मिली। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की अगुवाई में बनी सरकार का समर्थन किया।

सितंबर, 2006 में मधु कोड़ा और अन्य तीन निर्दलीय विधायकों ने अर्जुन मुंडा की सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। इसके बाद सरकार अल्पमत में आ गई। बाद में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार किया। कोड़ा के नेतृत्व में सरकार बनाई, जिसमें झामुमो, राजद, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, फॉरवर्ड ब्लॉक समेत तीन निर्दलीय विधायक शामिल थे। कांग्रेस ने उन्हें बाहर से समर्थन दिया था। वे भारत के किसी भी प्रांत के पहले निर्दलीय मुख्यमंत्री रहे। इसके लिए उनका नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल किया गया।

मधु कोड़ा का आरंभिक वैवाहिक जीवन विवादास्पद रहा। अभी उनकी पत्नी गीता कोड़ा जगन्नाथपुर से विधायक हैं। वह फिलहाल रघुवर दास के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन दे रही हैं।