झारखंड: दो नक्सली कमांडरों ने किया सरेंडर, बड़ी मात्रा में हथियार बरामद

आकाश सिंह, लोहरगादा (4 मई): झारखंड पुलिस ने माओवादियों की कमर तोड़ दी है। पुलिस और सीआरपीएफ ने नकुल और मदन का सरेंडर कराया है। उम्मीद जताई जा रही है कि इन दो बड़े नक्सलियों के सरेंडर के बाद माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है और इन्हें देखकर कई नक्सली मुख्यधारा में वापस आएंगे।


राज्य में माओवादी उग्रवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में झारखण्ड पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। करीब ढाई दशक तक नक्सल गतिविधियों में शामिल और 150 से अधिक मामले में वांछित बिहार रीजनल कमाण्डर नकुल यादव के साथ एक नक्सली का सरेंडर पुलिस ने कराया है। दूसरा नक्सली मदन यादव है जो भाकपा माओवादी संगठन में जोनल कमांडर था। नकुल के ऊपर 15 लाख और मदन के ऊपर 5 लाख रूपये का पुलिस ने इनाम रखा था। दोनों का इलाका लोहरदगा और चतरा समेत गुमला पलामू और रांची रहा है।


47 साल के नकुल यादव के खिलाफ लोहरदगा के अलग-अलग थाना इलाके में 54 मामले दर्ज हैं। वही मदन के खिलाफ भी दर्जनों मामले दर्ज हैं। एडीजी झारखण्ड आरके मल्लिक ने सरेंडर कार्यक्रम मौके पर ये समर्पण देश के सविंधान के प्रति है। राज्य सरकार की सरेंडर पालिसी का नक्सली लाभ लें और समाज की मुख्यधारा में शामिल हों। वहीं सीआरपीएफ आईजी संजय लाटकर ने कहा कि ये एक बड़ी उपलब्धि है जिससे नक्सल संगठन को बड़ा झटका है।


सरेंडर करने वाले नक्सली नकुल के निशानदेही पर पुलिस ने एंटी नक्सल ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बालों ने बड़ी मात्रा में हथियार भी बरामद किया है। उनमे एक 7.62 एलएमजी, एक सेमी आटोमेटिक राइफल, दो 303 बोर राइफल, एक एसएलआर राइफल, 3 इंसास राइफल 3000 से अधिक गोलियां बरामद की गयी है। इसके अलावा कोडेक्स वायर, चार्जर वॉकी टॉकी और कपडे बरामद किए गए हैं। सरेंडर के बाद नकुल ने नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने आह्वान किया है। नकुल पर बच्चों को संगठन जबरन शामिल करने का आरोप लगता आया था, जिससे उसने इंकार किया है।


झारखण्ड पुलिस लगातार नक्सलियों खिलाफ अभियान चला रही है ऐसे में नक्सलियों के सामने केवल दो रास्ते बचे है या तो वो कानून की शरण में आए या फिर गोली का सामना करने के लिए तैयार रहे। क्योंकि इसका इशारा झारखण्ड डीजीपी ने कर दिया है।