जेट एयरवेज के पायलटों का ऐलान, 1 अप्रैल तक वेतन नहीं तो काम बंद

Photo: Google

न्यूज 24 ब्यूरो नई दिल्ली, (20 मार्च) : गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे जेट एयरवेज की दिक्कतें लगातार बढ़ रही हैं। मंगलवार को इस एयरलाइन कंपनी के घरेलू उड़ानों वाले पायलटों की संस्था ने स्पष्ट चेतावनी दे डाली कि इस महीने वेतन नहीं मिला तो वे 1 अप्रैल से हड़ताल पर चले जाएंगे। इससे पहले, सोमवार को जेट ने लीज पर लिए विमानों का किराया नहीं चुका पाने के कारण 6 और जहाज सेवा से हटा लिए। इस वजह से जेट की देशभर की कई उड़ानें रद्द हो गईं।

वहीं नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने कहा कि जेट एयरवेज की फिलहाल 41 उड़ानें परिचालन की स्थिति में रह गयी हैं और आने वाले सप्ताह में इनमें और कमी आ सकती है। परिस्थिति कितनी विकट हो चुकी है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सोमवार को सिर्फ मुंबई एयरपोर्ट्स से ही जेट की 100 फ्लाइट्स कैंसल कर दी गईं। मंगलवार को जेट के कुल 119 जहाजों में से सिर्फ 36 ही उड़ान भर सके थे। उड़ानें रद्द होने से बड़ी तादाद में यात्री मुंबई एयरपोर्ट्स पर फंस गए। इनमें बिजनसमैन से लेकर रिसर्च साइंटिस्ट तक शामिल रहे। हालांकि डीजीसीए का मानना है कि जेट एयरवेज के मामले में स्थितियां तेजी से बदलती जा रही हैं।जेट एयरवेज की वेबसाइट के अनुसार एयरलाइन के पास कुल 119 विमानों का बेड़ा है। पिछले कुछ सप्ताह से एयरलाइन की उड़ानें रद्द होने से यात्री अपनी नाराजगी सोशल मीडिया पर जाहिर कर रहे हैं और परिचालित विमानों की संख्या में निरंतर कमी के साथ यह दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। अचानक रद्द ही उड़ानों के कारण जहाजों में यात्रियों के लिए जगह कम पड़ने लगे, इस कारण हवाई किराया रातोंरात बढ़ गया। मुंबई-दिल्ली, मुंबई-बेंगलुरु, मुंबई-कोलकाता और मुंबई-चेन्नै जैसे रूटों के लिए उड़ान से कुछ घंटे पहले के टिकटों के दाम पिछले वर्ष इसी वक्त के मुकाबले दोगुने हो गए। मुंबई-चेन्नै टिकट के लिए सभी कंपनियों का किराया पिछले वर्ष के 5,369 रुपये के मुकाबले बढ़कर 26,073 रुपये हो गया। भारत सरकार ने सरकारी बैंकों से कहा है कि जेट एयरवेज को दिवालिया प्रक्रिया में भेजे बिना इसकी मदद की जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं चाहेंगे कि आम चुनाव से ठीक पहले हजारों लोगों की नौकरी जाए।