'तमिल हिंदू थे जीसस क्राइस्ट, कश्मीर में ली समाधि'

नई दिल्ली (23 फरवरी): सत्तर साल पहले हिंदुत्व विचारधारावादी विनायक दामोदर सावरकर के भाई की लिखी 'विवादित' किताब का पहली बार प्रकाशन किया गया था। जिसे अब एक बार फिर से लॉन्च किया जा रहा है। इस किताब में बेहद 'अजीबोगरीब' दावे किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि जीसस क्राइस्ट एक तमिल हिंदू थे।

'इकॉनॉमिक टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह किताब विनायक दामोदर सावरकर के बड़े भाई गणेश सावरकर ने लिखी है। इसे हिंदुत्व के आइकन की 26 फरवरी को होने वाली बरसी पर फिर से लॉन्च किया जा रहा है। 'स्वातंत्र्यवीर सावरकर नेशनल मेमोरियल' के अध्यक्ष रंजीत सावरकर ने इसकी जानकारी दी है।

यह किताब पहली बार 1946 में प्रकाशित की गई थी। इसमें यह भी दावा किया गया है कि "ईसाई धर्म पहले हिंदू पंथ ही था। किताब में दावा किया गया है कि "एसीन पंथ ने क्रॉस पर चढ़ाए जाने पर क्राइस्ट को बचाया। उन्होंने हिमालय के हरे पौधों से बनाए गए मरहम से उनका उपचार किया।" इसमें कहा गया कि "क्राइस्ट ने कश्मीर में समाधि पाई।"

'क्राइस्ट परिचय' नाम से प्रकाशित इस किताब में दावा किया गया है कि जीसस जन्म से एक 'विश्वकर्मा ब्राह्मण' थे और ईसाई धर्म हिंदू धर्म का ही पंथ है। यह किताब मराठी भाषा में सावरकर नेशनल मेमोरियल की तरफ से लाई जा रही है। यह ट्रस्ट सावरकर भाइयों के साहित्य और विचारधारा का प्रचार प्रसार करते हैं। किताब में कहा गया है कि "वर्तमान का फिलिस्तीन और अरब की सीमाएं भी हिंदुओं की जमीन थी। इसके अलावा क्राइस्ट भारत आए थे और यहां उन्होंने योग सीखा।"

किताब में कहा गया है कि "क्राइस्ट का असली नाम केशव कृष्ण था। उनकी मातृभाषा तमिल थी और उनका रंग काला था।" जब इस किताब के दावों के बारे में बॉ़म्बे आर्कडियोसिसन हेरिटेज म्यूज़ियम के डायरेक्टर और वरिष्ठ प्रीस्ट फादर वार्नर डीसूज़ा से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि "इस तरह की किताबें ईसाइयों की आस्था को नहीं हिला सकतीं।"