जाट आंदलोन: जाटों ने सरकार से दूसरे दौर की वार्ता का न्योता ठुकराया

नई दिल्ली ( 16 जनवरी ): हरियाणा में जाट आंदोलन एक बार फिर बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि आंदोलन के समाप्त होने की उम्मीद फिलहाल टूट गई है और इस कारण तनाव बढ़ गया है। आंदोलनकारी जाटों ने राज्य सरकार का दूसरे दौर की बातचीत का निमंत्रण ठुकरा दिया है। यह बातचीत गुरुग्राम के जाट हाल में आज होने वाली थी। बातचीत में मुख्यमंत्री या कृषि मंत्री ओपी धनखड़ के शामिल होने की संभावना थी। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति का कहना है कि सरकार द्वारा नामित अफसरों की कमेटी से बातचीत करने का कोई औचित्य नहीं है। सरकार की नीयत भी साफ नजर नही आ रही है। अब 17 फरवरी की जसिया में होने वाली पंचयात के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।

कैबिनेट की फरीदाबाद में हुई बातचीत के बाद सरकार की ओर से जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक को बातचीत का न्योता दिया गया था। यह बातचीत गुरुग्राम में तय हुई लेकिन अचानक मलिक द्वारा मना कर दिए जाने से स्थिति विपरीत हो गई।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल और राज्य के गृह सचिव रामनिवास पिछले दो-तीन दिन से जल्द वार्ता होने का दावा कर रहे थे। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक का कहना है कि सरकार के प्रतिनिधि पिछले तीन दिन से उनके संपर्क में थे और दूसरे दौर की बातचीत के लिए प्रयासरत थे। लेकिन, उन्हें यह कहते हुए मना कर दिया गया कि जब तक मुख्यमंत्री बात नहीं करेंगे तब तक अफसरों की कमेटी से बातचीत करने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि यह कमेटी निर्णय लेने में सक्षम नहीं है।

मलिक से जब यह पूछा गया कि बातचीत मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनकड़ करने वाले थे तो उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्हें न तो कोई सूचना दी गई और न ही कोई जानकारी है। सरकार की नीयत भी ठीक नहीं है। फरीदाबाद की कैबिनेट मीटिंग के बाद से सरकार और मंत्री गलत बयानबाजी कर रहे हैं।