शीतयुद्ध की आहट, ट्रंप के खिलाफ जर्मनी, जापान और चीन होगा एकजुट !

नई दिल्ली (2 फरवरी): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रमक विदेश नीति के खिलाफ दुनियाभर के देशों में चिंता देखी जा रही है। 7 मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमेरिका में एंट्री पर पाबंदी के बाद बीजा नीति में बदलाव और 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति ने दुनियाभर के देखों को अपनी नीतियों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

ट्रंप 'अमेरिका फर्स्ट' कहकर मुक्त बाजार व्यवस्था को नियंत्रित करने की बातें कर रहे हैं, लिहाजा के दुनिया के अन्य देश उनकी कारोबार और व्यापार के क्षेत्र से जुड़ी धमकियों का जवाब तलाशने में जुटे हैं। ट्रंप का आरोप है कि जर्मनी और जापान विदेशी मुद्रा विनिमय के बाजार को प्रभावित कर अपने हित में व्यापार के नियम तय कर रहे हैं। ट्रंप के इस बयान के खिलाफ जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल एक साथ गए हैं।

यूरोपियन काउंसिल में विदेशी संबंधों के निदेशक मार्क लेनर्द का कहना है कि ट्रंप के साथ एक बहुत बड़ा टकराव खड़ा होने जा रहा है। ट्रंप अपने 'अमेरिका पहले' के अजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए चीन और बाकी देशों के साथ बेमतलब के जियोपॉलिटिकल मनमुटाव को उकसा रहे हैं।

 

ट्रंप प्रशासन की ओर से मिल रहे संकेतों के मुताबिक अब अमेरिका बहुपक्षीय समझौतों की जगह पर द्विपक्षीय संधियों को ज्यादा तरजीह देगा। इन आशंकाओं के मद्देनजर विश्व के बाकी राष्ट्राध्यक्ष अपने-अपने हितों को देखते हुए अपने लिए नए गठबंधन और समीकरण तलाशने में जुट गए हैं।

ट्रंप ने मेक्सिको से साफ-साफ कहा है कि उससे सटी सीमा के द्वारा अमेरिका में आने वाले प्रवासियों को रोकने के लिए वह एक दीवार बनाएंगे और मेक्सिको से आने वाले सामानों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाकर वह इस दीवार का खर्च वसूलेंगे। विश्व के नेता अब इस बात को समझ रहे हैं कि ट्रंप की बातों को नजरंदाज करना या उनकी धमकियों को हल्के में लेना सही नहीं होगा।