23 या 24 अगस्त, जानिए कब मनाएं 'जन्माष्टमी'?

Lord Krishna

स्मृति भार्गव, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (20 अगस्त): आजकल हर त्योहार को लेकर लोग दुविधा में रहते हैं क्योंकि ज्यादातर त्योहार दो दिन मनाए जाने लगे हैं । ऐसी ही असमंजस की स्थिति इस बार जन्माष्टमी को लेकर लोगों के मन में है । आधे पंचांग इस बार 23 अगस्त की जन्माष्टमी बता रहे हैं जबकि अन्य पंचांग 24 अगस्त की जन्माष्टमी बता रहे हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर हमें जन्माष्टमी का व्रत और पूजन किस दिन करना है ? आपके मन में जन्माष्टमी के त्योहार को लेकर जो भी उलझन है, उसको हम आज बहुत ही आसान तरीके से, शास्त्रोक्त तर्क देकर हल करने की कोशिश करते हैं ।

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स्मार्त और वैष्णवों की 'जन्माष्टमी'...

किसी भी पंचांग में जन्माष्टमी व्रत स्मार्त जनों के लिए पहले दिन और वैष्णवों के लिए दूसरे दिन बताया जाता है। वैदिक शास्त्रों में जो गृहस्थ जीवन बिताते हैं, जो पंचदेवों - ब्रह्मा, विष्णु, महेश, गणेश और उमा की उपसना करते हैं, वो स्मार्त  कहलाते हैं । जो किसी गुरु से दीक्षा लेते हैं, जो गुरु से कंठी, माला और तिलक ग्रहण करके धारण करते हैं, जो सिर्फ विष्णु की ही पूजा करते हैं वो वैष्णव कहलाते हैं । आसान शब्दों में कहें तो वैष्णव गृहस्थ जीवन से दूर रहने वाले होते हैं । ऐसे में 23 अगस्त को  स्मार्त यानि गृहस्थ लोग जन्माष्टमी का व्रत और पूजन करेंगे जबकि 24 अगस्त को वैष्णवों को जन्माष्टमी का व्रत और पूजन करना चाहिए ।

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'जन्माष्टमी' में तिथि का महत्व...

23 अगस्त को गृहस्थ लोगों को जन्माष्टमी क्यों मनानी चाहिए इसका एक और तर्क है । हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार, सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्‍णु के आठवें अवतार श्रीकृष्‍ण का जन्म भाद्रपद यानी भादो माह की कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी  तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था । स्मार्त जन सप्तमी और अष्टमी तिथि के योग में जन्माष्टमी मनाते हैं जबकि वैष्णव जन  अष्टमी और नवमी के योग में जन्माष्टमी का व्रत और पूजन करते हैं । वैष्णव जन हमेशा उदया तिथि को ही प्रार्थमिकता देते हैं,  ऐसे में 23 अगस्त को अष्टमी तिथि सुबह 8:09 पर शुरू होगी जो 24 अगस्त की सुबह 8:32 तक रहेगी । इस तरह देखा जाए तो  स्मार्त यानि गृहस्थ लोगों को 23 अगस्त को, जब रात 12 बजे भी अष्टमी तिथि व्याप्त है, तभी जन्माष्टमी का व्रत और पूजन करना चाहिए । वैष्णव जन जो उदया तिथि को महत्व देते हैं, उनके लिए 24 अगस्त को सूर्योदय के साथ अष्टमी तिथि के होने से तभी जन्माष्टमी का व्रत और पूजन करने का महत्व होगा।

(Image Credit: Google)