सत्यपाल मलिक का सनसनीखेज खुलासा, कहा- दिल्ली की ओर देखता तो सज्जाद लोन की बनती सरकार

आसिफ सुहाफ, न्यूज 24, नई दिल्ली (27 सितंबर): जम्मू कश्मीर में विधानसभा भंग करने के अपने फैसले को लेकर राज्य के राज्यपाल  सत्यपाल मलिक ने सनसनीखेज खुलासा किया है। राज्यपाल सत्यापाल मलिक ने राज्य में विधानसभा भंग करने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा है कि अगर वो अपने इस फैसले को लेकर दिल्ली की तरफ देखता तो उन्होंने राज्य में सज्जाद लोन की सरकार बनानी पड़ती। इसलिए उन्होंने विधानसभा भंग कर दी। वो बेईमानी नहीं कर सकते थे।

आपको बता दें कि इससे पहले सत्यपाल मलिक ने कहा था कि दोनों में से किसी के पास कोई लिस्ट नहीं थी। न तो महबूबा जी के पास कोई लिस्ट थी, जो उन्होंने पेश की हो और न ही सज्जाद लोन के पास कोई लिस्ट थी। सज्जाद लोन कह रहे थे कि मैंने आपको संपर्क किया। जब मैंने पूछा कहां संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि मैंने आपके पीए को वाट्सएप किया। मलिक ने चुटकी लेते हुए कहा, 'मुझे यह पता नहीं था कि वाट्सएप और ट्वीट से भी सरकारें बनती हैं'। उन्होंने कहा, सरकार बनाने के दावे वाट्सएप पर नहीं किये जाते। मैंने जब उस वाट्सएप मैसेज के बारे में पता किया तो पता चला कि जो पहले गवर्नर थे, उनका जो पीए था उसके पास मैसेज किया था। मैं 15 दिनों से यह सब देख रहा था और आश्वस्त था कि किसी के पास भी बहुमत नहीं है। एक को भी बुला लिया जाएगा तो खुला खेल होगा। इतनी अनैतिकता होगी, जिसका अंदाजा नहीं है। अगर हार्स ट्रेडिंग शुरू होती तो मुझे अंदाजा था कि इसमें पैसा तो आएगा ही, साथ ही आतंकी भी आएंगे। 8 जगह चुनाव बाकी थे। घाटी अपनी रौ में लौट रही थी।

सत्यपाल मलिक ने शनिवार को यहां कहा कि यदि महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला सरकार बनाने के प्रति गंभीर होते तो किसी के हाथों पत्र भेज सकते थे या फोन कर सकते थे। सत्यपाल मलिक ने ग्वालियर के एक निजी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा कि, ‘यदि महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला सरकार बनाने के प्रति गंभीर होते तो फोन कर सकते थे, किसी के हाथों पत्र भेज सकते थे। मेरा फोन हमेशा खुला रहता है, रात को दो बजे भी। मैं तो व्हाट्सऐप पर भी मैसेज आने पर समस्याएं हल करने की कोशिश करता हूं।’ मलिक ने विधानसभा भंग करने के बारे में विस्तार से चर्चा की और कहा कि ईद मिलाद उन नबी के दिन रसोइया भी छुट्टी पर था।  श्रीनगर और जम्मू के बीच कई उड़ानें हैं. अगर वे सरकार बनाने को लेकर संजीदा थे तो किसी को भी भेज सकते थे।

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