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कश्मीर से जाकिर मूसा का पूरा गैंग का हुआ सफाया: दिलबाग सिंह

जम्मू-कश्मीर को डीजीपी दिलबाग सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आतंकी गतिविधियों के कुचलने की जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि त्राल के राजपुरा में हुए एनकाउंटर में गजवत-उल-हिंद के तीन आतंकियों को मारे जाने के साथ ही इस आतंकी संगठन का खात्मा कर दिया गया है।

 न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (23 अक्टूबर):  जम्मू-कश्मीर को डीजीपी दिलबाग सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आतंकी गतिविधियों के कुचलने की जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि त्राल के राजपुरा में हुए एनकाउंटर में गजवत-उल-हिंद के तीन आतंकियों को मारे जाने के साथ ही इस आतंकी संगठन का खात्मा कर दिया गया है। साथ ही डीजीपी ने कहा है कि उग्रवाद पर नकेल कसे जाने से पाकिस्तान बौखला गया है और सीजफायर उल्लंघन की आड़ में घुसपैठिये भेजने की कोशिश कर रहा है।

सिंह ने बताया कि मंगलवार देर रात त्राल के राजपुरा में मारे गए तीनों लोकल मिलिटेंट अंसार गजवत-उल-हिंद का हिस्सा थे। उन्होंने बताया कि जाकिर मूसा के मारे जाने के बाद ग्रुप की कमांड हमीद ललहारी को दी गई। ललहारी तब से इसे चला रहा था और दूसरों को मोटिवेट किया था। उन्होंने बताया कि मूसा के बाद यह ग्रुप खत्म हो रहा था लेकिन ललिहारी ने युवाओं को मोटिवेट करके इसमें शामिल किया। इसी तरह मारे गए आतंकी नवीद और जुनैद इसमें शामिल हुए। तीनों अवंतीपुरा-पुलवामा के रहनेवाले थे।

दिलबाग दिलबाग सिंह ने दावा किया है कि गजवत-उल-हिंद फिलहाल खत्म हो गया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि पहले से मौजूद उसका कोई समर्थक अगर उभर आता है तो उसके बारे में कुछ कहना मुश्किल है लेकिन फिलहाल इसका खात्मा कर दिया गया है। उन्होंने बताया है कि जो आतंकी मारे गए हैं वे बहुत सारी घटनाओं में शामिल थे।

डीजीपी ने बताया कि पाकिस्तान सीजफायर उल्लंघन के जरिए आतंकियों की घुसपैठ की कोशिशें कर रहा है लेकिन उसे बराबर फेल भी किया जा रहा है। हालांकि, काफी घुसपैठिये भारत में दाखिल होने में कामयाब भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे घुसपैठिये आते रहते हैं, उनका सफाया भी जारी रहता है। उन्होंने दावा किया है कि इस ग्रुप के मारे जाने से आतंक का सफाया होगा और लोग जिस डर के साये में रहते थे, उसमें फर्क आएगा।

डीजीपी सिंह ने खुशी जताई है कि आर्टिकल 370 हटने के बाद से मिलिटेंसी बढ़ने में कमी आई है। उन्होंने कहा 5 अगस्त के बाद जो हालात बने उसके चलते लोगों में शक था कि बहुत बड़ी तादात में लोकल बच्चे मिलिटेंसी की ओर बढ़ेंगे लेकिन खुशी की बात यह है कि जो रफ्तार पहले मिलिटेंसी की ओर बढ़ने की होती थी, उससे बहुत कम लोगों ने इस अरसे में मिलिटेंसी की ओर रुख किया है।

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