जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल ने विधानसभा की भंग, महबूबा मुफ्ती और गुलाम नबी आजाद ने उठाए सवाल

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 नवंबर): इस पर राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि यह पूरा घटनाक्रम निराश करने वाला है। मुफ्ती ने कहा कि राज्यपाल को पहले सरकार बनाने की संभावनाओं पर गौर करना चाहिए था। आदर्श स्थिति यह होती कि वह सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते।

उन्होंने आगे कहा कि अगर सज्जाद लोन अपने साथ 18 विधायकों के होने का दावा कर रहे हैं तो इसका मतलब खरीद-फरोख्त हो रही है। हम आगे की संभावनाओं को तलाशेंगे। एक लोकतंत्र में ऐसे फैसलों की उम्मीद नहीं की जा सकती है।


वहीं, कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने इस घटनाक्रम पर कहा है कि बीजेपी नहीं चाहती है कि उसके अलावा कोई और सरकार बनाए। उन्होंने आगे कहा कि अब राज्य में तीन से चार महीनों में चुनाव हो जाने चाहिए, क्योंकि हम नहीं चाहते कि वहां पर राज्यपाल शासन लागू रहे। उन्होंने कहा कि बीजेपी का तानाशाही रवैया एक बार फिर से सबके सामने आ गया है। आजाद ने कहा कि अभी पार्टियों में बात भी नहीं हुई थी और विधायकों की बैठक बुलाई गई थी लेकिन बीजेपी नहीं चाहती जम्मू कश्मीर में कोई सरकार बने।


गुलाम नबी आजाद ने इस बात को स्वीकारा कि 23 नवंबर को वहां कांग्रेस के विधायकों की बैठक होने वाली थी जिसमें हम सरकार बनाने की संभावनाओं पर विचार करने वाले थे क्योंकि तीन चार महीनों से ऐसी बातें चल रही थी कि वहां पर सरकार बनाने की संभावनाओं को टटोला जाए। लेकिन पेंच यहां फंस रहा था कि इस तरह के हालात में ना तो कांग्रेस का कोई नेता मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार था ना ही नेशनल कॉन्फ्रेंस से कोई मुख्यमंत्री बनने के लिए राजी हो रहा था और ना ही पीडीपी अपना मुख्यमंत्री वहां चाह रही थी। इसमें वहां सरकार बनना संभव नहीं हो पा रहा था। हां रिबेल जरूर वहां चाह रहे थे कि सरकार बने। बीजेपी को जैसे ही पता चला कि सरकार बनने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है उन्होंने आनन-फानन में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया।