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आतंकी से सैनिक बने नजीर अहमद वानी ने हंसते-हंसते देश के लिए दे दी जान

देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले नजीर अहमद वानी पर हर सच्चे कश्मीरी ही नहीं पूरे वतन को गर्व है। हालांकि नजीर अहमद वानी अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी कुर्बानी हमेशा वतन याद रखेगा

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (27 सितंबर): देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले नजीर अहमद वानी पर हर सच्चे कश्मीरी ही नहीं पूरे वतन को गर्व है। हालांकि नजीर अहमद वानी अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी कुर्बानी हमेशा वतन याद रखेगा। रविवार को शोपियां में सुरक्षावलों ने 6 आतंकियों को मार गिराया। नजीर अहमद वानी भी सुरक्षाकर्मियों के इस ऑपरेशन में शामिल थे, लेकिन आतंकियों से लोहा लेते वक्त वो शहीद हो गए।नजीर अहमद वानी की कहानी बस इतनी ही नहीं है। घाटी के आम युवाओं की तरह नजीर अहमद वानी को भी आतंकियों ने कभी गुमराह कर लिया था। देश के दुश्मनों के बहकावे में आकर नजीर वानी आतंकी बन गए। आतंकी बनने के बाद उन्हें समझ में आई की वो क्या कर रहे हैं और किसके लिए किसके खिलाफ किस लिए लड़ रहे हैं। उन्हें जल्द से बात समझ में आई। उन्होंने आतंक का रास्ता छोड़ने का फैसला किया। इसमें नजीर अहमद वानी की मदद भारतीय सेना ने भी की। इसके बाद नजीर वानी में घाटी से आतंकियों के खात्मे का प्रण लिया और वो भारतीय सेना में शामिल हो गए।

नजीर अहमद वानी ने सेना में अपने करियर की शुरुआत 2004 में टेरिटोरियल आर्मी से की थी। लांसनायक वानी एक बेहतरीन सिपाही थे। 2007 में वीरता के लिए उन्‍हें सेना मेडल भी मिला। कुलगाम तहसील के चेकी अश्‍मूजी गांव के रहने वाले थे। लांस नायक नजीर अहमद वानी के परिवार में उनकी पत्‍नी और दो बच्‍चे हैं।  बता दें कि दक्षिण कश्‍मीर में स्थित कुलगाम जिला आतंकवादियों का गढ़ माना जाता है। उन्‍हें सोमवार को सुपुर्द-ए-खाक से पहले 21 तोपों की सलामी दी गई। रीति-रिवाजों के बाद शव को दफनाने के लिए नजदीक के एक कब्रगाह ले जाया गया जहां 500 से 600 ग्रामीण मौजूद थे।

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