आतंकवादी समस्या का इलाज मारना नहीं, एक व्यक्ति की मौत पर भी होती है तकलीफ: सत्यपाल मलिक

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (24 जनवरी): घाटी में लगातार आतंकियों का सफाया करने में सुरक्षाबल के जवान लगे हुए हैं। रोजाना आतं‍की और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ की खबर आती ही रहती है, ऐसे में जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि कश्मीर में आतंकवादी समस्या का इलाज मारना नहीं है।

सत्यपाल मलिक ने कहा कि एक भी व्यक्ति अगर मारा जाता है, चाहे वो आतंकवादी ही क्यों न हो तो उन्हें तकलीफ होती है। राज्यपाल ने कहा कि वो चाहते हैं कि सभी कश्मीरी बच्चे हथियार का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापस आएं। इसी के साथ उन्होंने बारामूला में आतंकवादियों के मारे जाने पर सुरक्षा बलों को बधाई भी दी। उन्‍होंने कहा, 'हम कोशिश कर रहे हैं कि इन बच्‍चों को पुर्नवास का अच्‍छा ऑफर दिया जाए। हत्‍या कोई समाधान नहीं है, क्‍योंकि आतंकवाद बंदूक में नहीं बल्कि इंसान के दिमाग में है। सुरक्षा बलों ने हाल के दिनों में गजब का काम किया है।'

बता दें कि राज्‍यपाल मलिक का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब सुरक्षाबलों ने हिज्बुल का गढ़ कहे जाने वाले कश्मीर के बारामूला जिले को आतंक के दंश से मुक्त करा लिया। उत्तरी कश्मीर के आतंक प्रभावित जिलों में से एक बारामूला को कश्मीर घाटी का पहला ऐसा जिला घोषित किया गया है, जहां पर अब कोई भी आतंकी मौजूद नहीं है। बुधवार को बारामूला की मुठभेड़ में तीन आतंकियों के मारे जाने के बाद सेना ने इस जिले को आतंक मुक्त घोषित कर दिया है। इस ऐलान के साथ बारामूला घाटी का पहला आतंक मुक्त जिला बन गया है।

बुधवार को ही बारामूला जिले के साफियाबाद में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के एक जॉइंट ऑपरेशन में तीन लश्कर आतंकियों को मार गिराया गया था। इस एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों के पास से सेना ने 3 एके-47 राइफल बरामद की थी। इस ऑपरेशन के दौरान सेना की 46 राष्ट्रीय राइफल्स, 4 पैरा फोर्सेज, एसओजी और सीआरपीएफ के जवानों ने लश्कर के तीन आतंकियों को ढेर किया था। इन आतंकियों पर बारामूला में ग्रेनेड अटैक और 3 स्थानीय युवकों की हत्या का आरोप था।