जम्मू-कश्मीर: ऐसे फैक्स मशीन ने बिगाड़ा सरकार बनाने का खेल, जानें- पूरा घटनाक्रम


आसिफ सुहाफ, न्यूज 24, श्रीनगर (22 नवंबर): बुधवार को जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग कर दी गई। पहले महबूबा मुफ्ती ने सरकार बनाने का दावा पेश किया। पीडीपी, कांग्रेस और नेशनल कांन्फ्रेंस के 56 विधायकों के समर्थन की चिट्टी सौंप दी, लेकिन तभी एकाएक कुछ ऐसा हुआ कि राज्यपाल ने जम्मू कश्मीर विधानसभा ही भंग कर दी।  ऐसा पहली बार हुआ है सरकार बनाने के लिए ट्विटर पर दावा किया गया है और ट्विटर पर ही विधायकों के समर्थन की चिट्ठी सौंप दी गई। 


महबूबा मुफ्ती ने ट्विटर पर दावा किया तो सज्जाद लोन ने ट्विटर पर ही सरकार बनाने का दावा पेश किया । मतलब ट्विटर पर एक के बाद एक दो लोगों ने सरकार बनाने का दावा पेश किया और अंत में राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधानसभा भंग करने का ऐलान कर दिया।


रात करीब 8.16 बजे  महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल ट्विट कर कहा कि आपका फैक्स काम नहीं कर रहा है। हम सरकार बनाने के लिए दावा पेश करना चाहते हैं। इसके ठीक एक मिनट बाद रात 8.17 बजे महबूबा ने दोबारा ट्विट कर राज्यपाल से कहा कि हम सरकार बनाने के दावे की चिट्ठी मेल भी कर रहे हैं। ये सब अभी चल ही रहा था कि ठीक 7 मिनट बाद सज्जाद लोन ने राज्यपाल के पीए को मैसेज किया और सरकार बनाने का दावा पेश किया। उसी वक्त राज्यपाल के पीए का मैसेज आता है ओके। एक साथ दो लोगों के सरकार बनाने के दावे के थोड़ी देर बाद राज्यपाल ने जम्मू कश्मीर विधानसभा ही भंग कर दी। मतलब राज्य में सरकार बनाने की सभी संभावनाएं एक झटके में खत्म हो गई। अब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने पड़ेंगे तभी नई सरकार बनेगी ।

पूरा मामला बुधवार दोपहर 3 बजे शुरू हुआ जब जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के गठबंधन की सरकार बनने की सुगबुगाहट शुरू हुई। अचानक राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।  प्रदेश में 16 साल बाद इस तरह के हालात बने थे।  2002 में भी पीडीपी-कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई थी और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बाहर से समर्थन दिया था। संकेत साफ थे सूबे में बीजेपी के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा तैयार हो रहा था, लेकिन दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर राज्यपाल ने साफ कर दिया कि किसी ने भी अब तक सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया है। इसके बाद पूरी शाम हर तरह के कयास लगाए जाने लगे.. माना जा रहा था कि किसी भी वक्त पीडीपी, एनसी और कांग्रेस सरकार बनाने का दावा पेश कर देंगे  और हुआ भी ऐसा ही। महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल को चिट्ठी भेज दी। चिट्ठी में सरकार बनाने का दावा पेश किया गया। महबूबा ने पीडीपी के 29, नेशनल कॉन्फ्रेंस के 15 और कांग्रेस के 12 विधायकों के समर्थन का दावा किया, लेकिन कहानी में यहां ट्विस्ट आ गया। क्योंकि राजभवन की फैक्स मशीन में खराबी के चलते महबूबा की चिट्ठी राज्यपाल तक नहीं पहुंची। जिसके बाद रात करीब सवा 8 बजे पीडीपी में बगावत की खबर आने लगी और इसके बाद सियासी उठापठक सोशल मीडिया पर पहुंच गई। रात 8 बजकर 16 मिनट पर महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल को भेजी गई चिट्ठी ट्वीट की और कहा कि राज्यपाल से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
महबूबा ने ट्विटर पर चिट्ठी पोस्ट करते हुए लिखा कि राजभवन में ये पत्र भेजने की कोशिश कर रही हूं। अजीब बात ये है राजभवन में फैक्स नहीं मिल रहा है।  फोन पर संपर्क करने की भी कोशिश की, लेकिन नहीं हो पाया। उम्मीद करती हूं वो इस पत्र को देख लेंगे। महबूबा मुफ्ती ने इस ट्वीट के तुरंत बाद एक और ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने इस पत्र को ई-मेल के ज़रिए राजभवन भेजने की बात कही।महबूबा के ट्वीट के बाद सियासी सरगर्मी तेज़ हो गई और रात 8 बजकर 20 मिनट पर पीडीपी विधायक इमरान अंसारी ने 18 विधायकों के साथ का दावा कर दिया, लेकिन इस सियासी खींचतान में अभी कई और मोड़ आने बाकी थे। रात 8 बजकर 24 मिनट पर पीपल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। सज्जाद लोन ने राज्यपाल के पीए को मैसेज कर दावा पेश किया। सज्जाद लोन ने ट्विटर पर पीए से की गई बातचीत का स्क्रीन शॉट पोस्ट करते हुए लिखा कि हमने माननीय राज्यपाल को सरकार बनाने का दावा पेश करते हुए पत्र भेजा है। फैक्स काम नहीं कर रहा है। हमने पत्र राज्यपाल के पीए को वॉट्सऐप कर दिया है। सज्जाद लोन ने अपने पत्र में बीजेपी के सभी 25 विधायकों के समर्थन के साथ अन्य 18 विधायकों के समर्थन की बात कही।


एक तरफ महबूबा कांग्रेस और एनसी के समर्थन से सरकार बनाने की आस लगाएं बैठी थीं  तो वहीं सज्जाद लोन बीजेपी और बागियों के दम पर सत्ता पर काबिज़ होने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सबसे बड़ा ट्विस्ट अभी बाकी था। रात करीब 9 बजे सरकार बनाने के तमाम दावों के बीच राज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग कर दी। राज्यपाल के फैसले ने सभी को हैरान कर दिया। कांग्रेस नेता गुलाब नबी आज़ाद ने कहा कि अफवाहों पर ही विधानसभा भंग कर दी गई। यह बीजेपी की तानाशाही है। वहीं महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट किया कि कौन सोच सकता था कि महागठबंधन के विचार से ही ऐसी घबराहट हो जाएगी।आज के तकनीक के युग में, ये हैरान करने वाला है कि माननीय राज्यपाल के निवास की फैक्स मशीन पर हमारा फैक्स नहीं मिला लेकिन उसी मशीन ने विधानसभा भंग करने का फैक्स तुरंत जारी कर दिया।
विधानसभा भंग होने के बाद प्रदेश में अब चुनाव के जरिए ही नई सरकार बनाई जा सकती है। ऐसे में माना जा रहा है कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के साथ ही राज्य में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। वहीं जिस तरह पीडीपी ने कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ समर्थन का दावा किया। ऐसे में आगामी चुनावों में इनके साथ आने के भी कयास लगाए जा रहे हैं।

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