जम्मू-कश्मीर में सुधर रहे हैं हालात, अगले छह महीने में हो सकते हैं चुनाव- अमित शाह

JK

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (28 जून): गृह मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में जम्मू-कश्मीर में 6 महीने के लिए राष्ट्रपति शासन और बढ़ाने के लिए प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री ने कहा कि राज्य में लगातार हालत सुधर रहे हैं और अगले 6 महीने में यहां विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि रमजान का पवित्र महीना था, अब अमरनाथ यात्रा होनी है, इस वजह से चुनाव कराने इस दौरान मुमकिन नहीं था। इस साल के अंत में चुनाव कराने का फैसला लिया गया।  चुनाव आयोग ने इस साल के आखिर में चुनाव कराने का फैसला करेंगे और इस बारे में सूचित कर दिया जाएगा। साथ ही शाह ने कहा कि वहां राष्ट्रपति शासन बढ़ाना जरूरी हो गया है और इस दौरान वहां चुनाव हो जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्यपाल और राष्ट्रपति शासन के दौरान जम्मू कश्मीर में एक साल की अवधि में पहली बार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति अपनाई गई है। एक साल के अंदर आतंकवाद की जड़ों को हिलाने के लिए इस सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। पहले वहां कई साल तक पंचायत चुनाव नहीं कराए जाते थे लेकिन यही एक साल के अंदर वहां शांतिपूर्ण पंचायत चुनाव कराए गए हैं। बीजेपी की सरकार ने वहां की पंचायतों को पैसा देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि 40 हजार पदों के लिए वहां चुनाव हुआ और एक भी जान नहीं गई। इस बार वहां मत प्रतिशत बढ़ा और हिंसा भी नहीं हुआ। कानून व्यवस्था सरकार के नियंत्रण में है, यह इसका उदाहरण है।

गृह मंत्री जम्मू-कश्मीर में 6 महीने राष्ट्रीय शासन और बढ़ाने का प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि जब कोई दल राज्य में सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं था तो कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाया गया था। इसके बाद विधानसभा को भंग करने का फैसला राज्यपाल ने लिया था। 9 दिसंबर 2018 को राज्यपाल शासन की अवधि खत्म हो गई थी और फिर धारा 356 का उपयोग करते हुए 20 दिसंबर से वहां राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला लिया गया। 2 जुलाई को छह माह का अंतराल खत्म हो रहा है और इसलिए इस राष्ट्रपति शासन को बढ़ाया जाए क्योंकि वहां विधानसभा अस्तित्व में नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पहली बार जनता महसूस कर रही है कि जम्मू और लद्दाख भी राज्य का हिस्सा है। सबको अधिकार देने का काम मोदी सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए सीमा पर रहने वाले लोगों की जान कीमती है और इसलिए सीमा पर बंकर बनाने का फैसला हुआ है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में लोकतंत्र बहाल रहे ये बीजेपी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आतंकवाद के खात्मे की कार्रवाई भी की जा रही है। उन्होंने सदन से अपील करते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन के प्रस्ताव का समर्थन करें।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल सदन में पेश करते हुए कहा कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा सीमा पार से होने वाली गोलीबारी से प्रभावित होते हैं और उन्हें आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा से लगे लोगों को जो 3 फीसदी आरक्षण है इसके अदंर अतंरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक रहने वालों को भी 3 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए। ये आरक्षण किसी को खुश करने के लिए नहीं लेकिन मानवता के आधार पर उनकी समस्या को देखते हुए आरक्षण दिया जाना चाहिए।

वहीं कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाये जाने का विरोध किया है। लोकसभा में आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध किया। साथ ही उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोग काफी लंबे वक्त से आरक्षण की मांग कर रहे थे लेकिन अब चुनावी फायदा होने के बाद उन्हें यह आरक्षण दिया जा रहा है। प्रेमचंद्रन ने कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए अब यह बिल लाया गया है और इसका विरोध करता हूं। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के साथ कश्मीर में विधानसभा चुनाव क्यों नहीं कराए गए, वह चुनाव भी शांतिपूर्ण तरीके से हो जाते। मनीष तिवारी ने जम्मू कश्मीर आरक्षण बिल और राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का विरोध करते हुए कहा कि राज्य में बीजेपी ने पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाए और यह गलत गठबंधन था। आज कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के हालात बीजेपी और पीडीपी के गठबंधन से बने हैं।  उन्होंने कहा कि आज जो कश्मीर में हालात है उसके लिए इतिहास में पीछे जाने की जरूरत है। तिवारी ने कहा कि 1990 में वीपी सिंह की सरकार था, जिसे बीजेपी और लेफ्ट का समर्थन हासिल था, तब से जम्मू कश्मीर के हालात बिगड़ने शुरू हुए। कांग्रेस की ओर से सरकार को चेताने के बावजूद भी राज्य के हालात नहीं सुधरे और वहां राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा। कश्मीर में हालात बिगड़े उसके लिए कश्मीर के लोग नहीं बल्कि पाकिस्तान जिम्मेदार था। पड़ोसी मुल्क ने पहले पंजाब और फिर कश्मीर में दखल दी, जिससे दोनों राज्यों के हालात बिगड़े। 1996 में कांग्रेस ने स्थिति को संभाला और वहां विधानसभा चुनाव हुए और नेशनल कांफ्रेंस की सरकार बनी जो 6 साल तक चली। फिर 2002 के चुनाव में पीडीपी-कांग्रेस की सरकार बनी। 2003 में जब पूर्व प्रधानमंत्री श्रीनगर गए तो उन्होंने इंसानियत और कश्मीरियत की बात की और बढ़ा दिल दिखाया।