खुफिया सूत्रों के हवाले से खबर, दिसंबर में ही जैश के 21 आतंकियों ने कर ली थी घुसपैठ


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (19 फरवरी): पुलवामा में 14 फरवरी के सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद सेना के साथ-साथ देश की सुरक्षा एजेंसी और खुफिया एजेंसी चौकस है और आतंकियों के तमाम नेटवर्क को ध्वस्त करने और उसके तार को खंघालने में जुटी हैं। इसी कड़ी में खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि पिछले साल दिसंबर में जैश-ए-मोहम्मद के 21 आतंकी घाटी में घुसपैठ करने में कामयाब रहे थे। बताया जा रहा है कि इन सभी 21 आतंकियों में 3 आत्मघाती हमलावर भी शामिल था। इनकी योजना घाटी के साथ-साथ घाटी के बाहर भी बड़े आतंकी वारदात को अंजाम देने की थी।


बताया जा रहा है कि उनके मंसूबे भारत में तीन आत्मघाती हमला करना था। इनमें से दो की योजना घाटी के बाहर हमला करने की थी। जानकारी के मुताबिक आतंकियों के इस जत्थे का सरगना जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर के भतीजे मोहम्मद उमैर ने गाजी रशीद उर्फ कामरान के साथ किया था। बताया जा रहा है कि गाजी रशीद ही पुलवामा में सीआरपीएफ  के काफिले पर हमले का मास्टरमाइंड था जो सोमवार को एनकाउंटर में मारा गया। खुफिया सूत्रों ने बताया कि इन आतंकियों को अजहर मसूद के दूसरे भतीजे उस्मान हैदर और संसद हमलों के दोषी अफजल गुरु का बदला लेने के लिए भेजा गया था।


जानकारी के मुताबिक घाटी में घुसते ही आतंकियों का ये ग्रुप दो टुकड़ों में बंट गया। एक का मुद्दसिर खान और दूसरे दल का अगुवाई शहीद बाबा था। आतंकी बाबा पुलवामा के द्रुवगाम में एक फरवरी को मुठभेड़ में मारा गया था। वहीं तीन आत्मघाती हमलावरों में से एक स्थानीय कश्मीरी आदिम अहमद डार 14 फरवरी को सीआरपीएफ काफिले पर हुए हमले में शामिल था और वहीं मारा गया था। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक जैश के दल के दोनों ग्रुप ने 16 गाड़ियां खरीदी। जिनका रजिस्ट्रेशन नंबर 1990 और 1995 के बीच का था। आपको बता दें कि 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले में हुए आत्मघाती हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन ने ली थी।