डोकलाम पर चीन का रुख आक्रामक, सीमा का लगा रहा है गलत अर्थ- एस जयशंकर

नई दिल्ली (19 जुलाई):  डोकलाम में पिछले एक महीने से भारत और चीन के बीच तनाव बना है। दोनों देशों की सेना तंबू डालकर एक दूसरे का विरोध कर रही है। इन सबसके बीच विदेश सचिव एस जयशंकर संसद की स्थायी समिति से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा की डोकलाम को लेकर चीन का रुख आक्रामक है और वो सीमा को भी गलत तरीके से पेश कर रहा है। उन्‍होंने कहा कि भारत सीमा पर दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए राजनयिक चैनल से चीन के साथ बातचीत की कोशिश कर रहा है।

एस जयशंकर ने भरोसा जताया कि इस विवाद पर राजनयिक तरीके से बात करना जारी रखेंगे। विदेश सचिव ने समिति को बताया कि सीमा को लेकर भारत और चीन ने अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है लेकिन वे उसका गलत अर्थ लगा रहे हैं, जिसे भारत स्पष्ट करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक एंग्लो-चीनी समझौते के अनुसार वर्ष 1895 से अब तक भारत के रुख में कोई परिवर्तन नहीं आया है। एक अन्य सदस्य ने बताया कि विदेश सचिव ने ‘युद्ध जैसी स्थिति या विवाद’ जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया बल्कि डोकलाम की हालिया स्थिति के वर्णन के लिए उन्होंने ‘टकराव’ शब्द का इस्तेमाल किया। बताया जा रहा है कि इस बैठक के दौरान राहुल गांधी, शशि थरूर (पैनल चेयरमैन), सीपीएम के मोहम्मद सलीम, टीएमसी के सौगत बोस और बीजेपी सांसद शरद त्रिपाठी मौजूद थे।

आपको बात दें कि भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा है. यह सीमा जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैली हुई है. इस बॉर्डर का एक हिस्सा (करीब 220 किलोमीटर) सिक्किम में आता है. इसी इलाके के एक सेक्शन को लेकर विवाद है.