मसूद अजहर का दावा, मुझे पकड़ने के लिए भारत ने तालिबान को पैसे ऑफर किए थे

नई दिल्ली(6 जून): पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड और जैश-ए-मोहम्मद का चीफ मौलाना मसूद अजहर ने दावा किया है कि कंधार कांड में रिहाई के बाद उसे दोबारा पकड़ने के लिए भारत ने तब की तालिबान सरकार को पैसों की पेशकश की थी। उसने दावा कि विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने तालिबान चीफ मुल्ला अख्तर मंसूर से मुलाकात भी की थी।

आपको बता दें पिछले महीने ड्रोन हमले में मंसूर मारा गया। अजहर को 1999 में हाईजैक हुए इंडियन एयरलाइंस के IC-814 प्लेन के पैसेंजर्स के बदले रिहा किया गया था। मसूद ने ये दावा जैश के माउथपीस 'अल-कलाम' के 3 जून के एडिशन में किया है।

अजहर ने मैगजीन में 'सईदी' नाम से मंसूर को श्रद्धांजलि दी है, उसी में ये सारी बातें लिखी हैं। बता दें कि प्लेन हाईजैकिंग के वक्त मंसूर तालिबान का सिविल एविएशन मिनिस्टर था। प्लेन छुड़ाने के लिए की गई बातचीत के बाद 3 आतंकियों को 31 दिसंबर, 1999 को रिहा किया गया था। तब की एनडीए सरकार ने अजहर समेत मुश्ताक अहमद जरगर और अहमद उमर सईद शेख को काबुल ले जाकर छोड़ा था। कंधार एयरपोर्ट पर खुद मंसूर, अजहर को लेने आया था।

अजहर के मुताबिक कंधार एयरपोर्ट पर मेरी मुल्ला अख्तर मंसूर से एक बार मीटिंग हुई थी। एयरपोर्ट उसकी मिनिस्ट्री में आता था। मैं कराची के डेलिगेशन का हिस्सा था। तालिबान ने डेलिगेशन को काबुल से कंधार लाने के लिए प्लेन मुहैया करवाया था। कंधार एयरपोर्ट पर मंसूर ने ही हमारा वेलकम किया। हमें वीआईपी लाऊंज में ठहराया गया। मुल्ला साहब ने मुझे सोफे पर अपने बगल में बैठाया।

अजहर लिखता है कि मंसूर ने मुझे बताया कि जसवंत सिंह जब तुम्हें (अजहर को) कंधार छोड़ने आए थे, तब इसी सोफे पर बैठे थे। अजहर ने ये भी बताया कि जसवंत ने मंसूर से कहा कि हमारे कैदी (अजहर, जरगर, शेख) अफगानिस्तान में ही रहेंगे और आप उन्हें पकड़कर हमारे हवाले कर सकते हो। हम आपकी हुकूमत को मालामाल कर देंगे। मंसूर ने मुझसे कहा कि अगर तुम भारत सेफली लौटना चाहते हो तो ये बड़ी बात होगी।

वहीं तब के RAW चीफ रहे एएस दौलत के मुताबिक हमने तालिबान को किसी तरह के पैसे का ऑफर नहीं दिया। ये बकवास है। दौलत के मुताबिक ये दुर्भाग्यपूर्ण है ये दावा दो लोगों की बातचीत पर बेस्ड है। इसे कोई वैरिफाई नहीं कर सकता। क्योंकि एक (मंसूर) की मौत हो चुकी है और दूसरा (जसवंत सिंह) कोमा में हैं।

पूर्व डिप्लोमैट विवेक काटजू के मुताबिक मुझे जान नहीं पड़ता कि ऐसी कोई बातचीत हुई थी। उस दौरान मैं जसवंत सिंह के साथ ही था। ये सारी आधारहीन बातें हैं। बता दें कि प्लेन हाईजैक के दौरान पाकिस्तान-अफगानिस्तान-ईरान से बातचीत करने वाले अफसरों को काटजू ही हेड कर रहे थे।

एक अन्य रॉ अफसर आनंद अर्नी के मुताबिक, 'जितना मुझे याद आता है, मुझे नहीं लगता कि मंसूर, जसवंत सिंह से मिला था। अर्नी के मुताबिक, 'जसवंत, तब के अफगान फॉरेन मिनिस्टर वकील अहमद मुत्तवकील के साथ चाय पीने गए थे। लेकिन मैं वहां मौजूद नहीं था। कंधार एयरपोर्ट पर जब हम आतंकियों को लेकर पहुंचे, उस समय वहां काफी भीड़भाड़ थी। मैं एक दूसरे प्लेन से निकल गया। मुझे नहीं लगता कि तालिबान उन्हें हमारे हवाले करता।'