जयपुर से 50 लाख की नकली दवाएं जब्त, 10 साल से बेच रहे थे ‘मिट्‌टी’ की गोली

जयपुर (3 जून): जयपुर पुलिस ने देशभर में नकली दवाओं की सप्लाई करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। ड्रग डिपार्टमेंट ने 50 लाख रुपए से अधिक की नकली एंटीबायोटिक पकड़ी हैं। ये वे एंटीबायोटिक हैं जो कि मेडिसिन से लेकर आईसीयू तक में भर्ती मरीजों को इंफेक्शन होने पर दी जा रही थी। ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया कि डिपार्टमेंट ने अजमेर रोड स्थित रेल नगर में गोदाम पर यह छापा मारा और नकली दवाएं जब्त की। राजस्थान से हरियाणा, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक तक में ये नकली दवाएं सप्लाई की जा रही थी। ड्रग डिपार्टमेंट ने एंटिबायोटिक दवा मेडसेफ 200 एमजी, मिक्सीन 200 एमजी, जानफिक्स एमजी200 एवं केटीसील 200 एंटीबायोटिक दवा का सैंपल लिया था। इन दवाओं में जीरो घटक पाया गया। ये नकली दवाएं दवा रेल नगर स्थित कमला एंटरप्राइजेज के गोदाम में स्टॉक की हुई थी। एंटरप्राइजेज के पास दवा का सेल लाइसेंस था मगर स्टॉक लाइसेंस नहीं था। मालिक विनोद कुमार से टीम पूछताछ जारी है।

कमला एंटरप्राइजेज पिछले दस सालों से एंटीबायोटिक के रूप में दवाओं का बेचान कर रहा था। विभाग को शक है कि लभग इतने ही समय से ही नकली दवाओं का कारोबार चल रहा है। यानि कि प्रदेश में ही हर साल करोड़ों रुपए की नकली दवाएं मरीज खा रहे थे। लेकिन आश्चर्य की बात यह कि इतने समय से ड्रग डिपार्टमेंट की किसी भी कार्रवाई में यह पकड़ा ही नहीं गया। मालूम हुआ है कि इस एंटरप्राइजेज से दस वर्षों में दो-तीन बार ही सैंपल लिए गए।

पकड़ी गई दवाएं उत्तराखंड से मेन्यूफेक्चरिंग बताई गई हैं। लेकिन विभाग को शक है कि मेन्युफेक्चरिंग वहां नहीं हो रही है। फिलहाल उत्तराखंड के ड्रग कंट्रोलर को इस सम्बन्ध में जांच के निर्देश दिए गए हैं। संभवतया शनिवार तक इसकी रिपोर्ट वहां से ले ली जाएगी। दवाओं में शून्य घटक पाया गया है। मतलब यह दवा मिट्‌टी या चूने से ज्यादा नहीं। डॉक्टर्स के अनुसार पहले दिन एक से तीन एंटीबायोटिक दी जाती है। यदि उसमें साल्ट ही नहीं हैं तो मरीज को फायदा नहीं होगा। डॉक्टर दवाई की डोज बढ़ा देगा। एक की जगह दो और तीन टेबलेट भी कर देगा। फायदा फिर भी नहीं होगा। इंफेक्शन बढ़ जाएगा और मरीज की जान तक जाना तय है।