जयललिता को ज्योतिष पर था बहुत भरोसा, इन वजहों के 4:30 बजे के बाद होगा अंतिम संस्कार !

चेन्नई (6 दिसंबर): जयललिता को ज्योतिषी विद्या और इसकी गणनाओं पर बहुत यकीन था। कहा जाता है कि ज्योतिषिय गणना और ग्रहों की दिशा के आधार पर फैसले लिया करती थीं। कहते हैं कि जब 1999 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार से उन्होंने समर्थन वापस लिया, तो उस फैसले के पीछे राजनैतिक मतभेदों के साथ-साथ ज्योतिष गणनाओं का भी बहुत बड़ा हाथ था।

बताया जाता है कि समर्थन वापसी की घोषणा से पहले जयललिता ने किसी से भी मिलने से इनकार कर दिया था। उनके ज्योतिषियों ने उन्हें बताया था कि उनकी कुंडली का चंद्रमा आंठवें घर में है और यह उनके लिए अशुभ हो सकता है। ऐसे में जयललिता कई घंटे तक होटल के अपने कमरे में बंद रहीं और किसी से भी नहीं मिलीं। बताया जाता है कि उनके ज्योतिष ने समर्थन वापसी की घोषणा की तारीख और वक्त दोनों बता दिया था।

कहते हैं कि जयललिता ज्योतिषों की सलाह लिए बिना ना कोई योजना बनाती थीं और ना ही कोई फैसला लेती थीं। पंचांग से मुहूर्त निकाले बिना शायद ही उन्होंने कोई फैसला लिया हो। प्रशासन से जुड़े निर्णयों पर भी जयललिता ज्योतिषीय गणनाओं का सहारा लिया करती थीं। योजना का क्या नाम होना चाहिए, इसे कब लॉन्च किया जाना चाहिए, जैसे फैसले पंचांग से मुहूर्त निकाले बिना पूरे नहीं होते थे। उनके बारे में यह किस्सा भी मशहूर है कि एक बार उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह रद्द कर दिया था। उन्हें बताया गया था कि जिस समय पर कार्यक्रम तय किया गया है, वह उनके लिए शुभ नहीं है।

जयललिता को अंक ज्योतिष पर भी बहुत भरोसा था। साल 2011 में उन्होंने अपने नाम में एक अतिरिक्त A जोड़ा था। कहते हैं कि उन्होंने मन्नत मांगी थी। फिर जब वह चुनाव जीतकर सत्ता में आईं, तो उन्होंने अपने नाम के अंत में एक और A जोड़ लिया। पहले उनके नाम में Jayalalitha 11 अक्षर थे, एक और A जुड़ जाने के बाद 12 अक्षर हो गए।

अपोलो अस्पताल की ओर से जारी बयान में बताया गया कि जयललिता ने सोमवार रात 11.30 बजे आखिरी सांस ली। उनकी मौत 5 दिसंबर को हुई। अपने जन्म के ग्रहों और कुंडली को ध्यान में रखते हुए वह 5 और 7 को अपना भाग्यशाली अंक मानती थीं। संयोग से उनके निधन की तारीख भी 5 ही है। बताया जा रहा है कि पंचांग के हिसाब से बुधवार को अष्टमी तिथि है। जयललिता 8 अंक को अपने लिए शुभ नहीं मानती थीं। ऐसे में उनकी अंतिम यात्रा पर के लिए यह तिथि उचित नहीं मानी गई। अंतिम संस्कार का समय भी पंचांग के हिसाब से तय किया गया है। मंगलवार दोपहर 3.30 से लेकर अपराह्न के 4.30 तक राहू काल है। इस अवधि में कोई काम नहीं किया जाना चाहिए। यही वजह है कि उनकी अंतिम यात्रा शुरू करने का समय भी 4.30 के बाद ही तय किया गया है।