पहली बार राजपथ पर हुई यह खास बातें...

नई दिल्‍ली (26 जनवरी): 67वें गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों सेना प्रमुखों के साथ अमर जवान ज्योति पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजली दी। इसके बाद पीएम ने राजपथ पर मुख्य अतिथि फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद का स्वागत किया और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राजपथ पर तिरंगा फहराया।

परेड में फ्रांस की टुकड़ी ने मार्च पास्ट किया। यह पहला मौका है जब किसी दूसरे देश की टुकड़ी ने राजपथ पर मार्चपास्ट किया। परेड में 26 साल के बाद सेना के श्वान (कुत्ता) दस्ते ने भी अपने हैंडलर्स के साथ भाग लिया।

राजपथ पर क्या हुआ खास: फ्रांस की सेना के 70 सैनिकों ने पहली बार राजपथ पर अपने बैंड की धुन के साथ मार्च किया। यह पलटन 1781-1784 तक भारत में रही। इसका ध्येय वाक्य है-सब हट्टे-कट्टे, कोई मरियल नहीं। 200 साल पहले बनी राजपूत रेजिमेंट ने भी मार्च किया। सबसे पहले इसी का राष्ट्रीयकरण हुआ था। सिख लाइट रेजिमेंट के कंबाइंड बैंड ने संविधान धुन के साथ मार्च किया। आजादी के बाद स्थापित की गई गोरखा रेजिमेंट ने जोशो खरोश से मार्च किया। इसका युद्धघोष है-यत्रोहम् विजयस्तत्र पहली बार राजपथ पर आर्मी वेटेरंस की झांकी निकली। पूर्व सैनिकों को स्कूलों में भी नियुक्त करने की योजना परेड में 26 साल के बाद सेना के श्वान (कुत्ता) दस्ते के सदस्य भी अपने हैंडलर्स के साथ शामिल हुए।