सरकार आज लोगों को देगी बहुत बड़ी राहत!

नई दिल्ली(10 नवंबर): जीएसटी काउंसिल की दो दिवसीय बैठक असम के गुवाहाटी में गुरुवार को शुरु हो गई। आज बैठक का आखिरी दिन है। बैठक में कई वस्तुओं पर टैक्स कटौती की घोषणा हो सकती है।

- 28 फीसदी टैक्स स्लैब में शामिल दैनिक इस्तेमाल की वस्तुओं, प्लास्टिक प्रॉडक्ट्स और हाथ से बने फर्नीचर पर उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।

- आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (GST) लागू होने के 4 महीने बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली की अगुआई में पैनल समग्र रूप से टैक्स दरों की समीक्षा करेगा। इसके अलावा रिटर्न फाइलिंग को आसान बनाने और छोटे व मध्यम उद्योगों के लिए राहत की घोषणा की जा सकती है।  

- काउंसिल उन सेक्टर्स में रेट कटौती कर सकती है, जिनमें पुराने टैक्स सिस्टम के तहत वस्तुओं पर एक्साइज से छूट मिली हुई थी या कम वैट लगता था और अब इनपर टैक्स अधिक हो गया है। काउंसिल टैक्स दरों पर उद्योगों की चिंताओं को दूर करना चाहती है इसलिए राजस्व पर असर का अनुमान लगाने के बाद 28 फीसदी टैक्स स्लैब की वस्तुओं पर टैक्स कटौती की जा सकती है। 

- एक अधिकारी ने बताया, 'दैनिक इस्तेमाल की वस्तुओं जैसे, शैंपू पर टैक्स में कटौती संभव है। इसे अब 18 फीसदी टैक्स स्लैब में लाया जाएगा। फर्नीचर, इलेक्ट्रिक स्वीच और प्लास्टिक पाइप पर भी राहत मिलेगी।' 

- GST कंपोजिशन स्कीम को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए गठित मंत्रियों के समूह ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। GoM ने मैन्युफ़ैक्चरर्स और रेस्ट्रॉन्ट्स के लिए टैक्स रेट्स घटाकर योजना के तहत 1 प्रतिशत करने को कहा है। फिलहाल, मैन्युफ़ैक्चरर्स 2 प्रतिशत GST का भुगतान करते हैं जबकि रेस्ट्रॉन्ट्स के लिए रेट 5 प्रतिशत है। उधर, कारोबारियों को अभी 1 प्रतिशत के हिसाब से जीएसटी देना होता है। 

- असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्व शर्मा की अध्यक्षता में गठित GoM ने यह भी सुझाव दिया है कि उन एसी और नॉन-एसी रेस्ट्रॉन्ट्स के बीच टैक्स रेट के अंतर को हटाया जाए, जो कंपोजिशन स्कीम के तहत शामिल नहीं हैं और उनसे 12 प्रतिशत टैक्स लिया जाए। 

- यह भी कहा गया है कि होटल्स, जिनके रूम टैरिफ 7,500 रुपये से ज्यादा हैं, को 18 प्रतिशत टैक्स रेट पर लुभाने की कोशिश करनी चाहिए। गौरतलब है कि कंपोजिशन स्कीम मैन्युफ़ैक्चरर्स, रेस्ट्रॉन्ट्स और ट्रेडर्स के लिए खुली है जिनका टर्नओवर 1 करोड़ से ज्यादा नहीं है। यह सीमा पहले 75 लाख रुपये थी और GST काउंसिल ने हाल ही में इसे बढ़ाकर 1 अक्टूबर से 1 करोड़ रुपये कर दिया था।