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डॉक्टरों और लैब्स की मिलीभगत का भंडाफोड़, आयकर विभाग ने जब्त की 100 करोड़ की अघोषित संपत्ति

नई दिल्ली(3 दिसंबर): आयकर विभाग अधिकारियों ने मेडिकल सेंटरों और डॉक्टरों की मिलीभगत का भंडाफोड़ किया है। मामले में 100 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का पता चला है। विभाग ने कई आईवीएफ क्लीनिक्स और डायग्नोस्टिक सेंटरों पर छापा मारा था। 

- बताया जा रहा है कि डॉक्टरों को मेडिकल टेस्ट्स के लिए लैब रिफर करने पर पैसे मिल रहे थे। विभाग ने लगभग 1.4 करोड़ रुपये कैश और 3.5 किलो जेवर जब्त किए हैं। इसके लिए तीन दिन तक दो आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) सेंटरों और पांच डायग्नोस्टिक सेंटरों की जांच की गई थी। विभाग के अधिकारियों ने विदेश मुद्रा भी बरामद की है। जांच में कई करोड़ रुपये विदेशी बैंकों में जमा होने की बात भी सामने आई है। अधिकारियों को ऐसे कई तरीकों के बारे में भी पता चला है जिनसे डॉक्टरों को केस रिफर करने के पैसे मिलते थे। 

-विभाग की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि डॉक्टरों को अलग-अलग लैब से अलग-अलग राशि मिलती थी। एमआरआई कराने पर लगभग 35 प्रतिशत कमीशन और सीटी स्कैन के लिए 20 प्रतिशत कमीशन डॉक्टरों की जेब में जाता था। इसी तरह दूसरे टेस्ट्स के लिए भी कमीशन उन्हें दी जाती थी। इन सभी का ब्यौरा मार्केटिंग के खर्च के नाम पर दिया जाता था। यहां तक कि चेक से भुगतान होने पर उसे 'प्रफेशनल फी' का नाम दे दिया जाता था। 

-इन लैब्स और सेंटर्स ने डॉक्टरों तक रकम पहुंचाने के लिए एजेंट्स भी रखे हुए थे। ये एजेंट्स एक लिफाफे में पैसे पहुंचाते थे। इन लिफाफों के अंदर मरीजों की जानकारी, टेस्ट्स के नाम, बिल जैसी जानकारियां दी जाती थीं। 


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